विचार
जो इंसान झूठ पकड़े जाने पर भी
अपनी गलती न माने,
उसके सुधरने की
गुंजाइश बहुत कम रह जाती है।
गलती स्वीकार करना कमजोरी नहीं,
बल्कि अच्छे चरित्र की पहचान है।
क्योंकि सच से भागने वाला व्यक्ति
धीरे-धीरे अपने ही विश्वास को खो देता है।
जो अपनी भूल मान लेता है,
वह सीख जाता है…
और जो अहंकार में सच ठुकरा देता है,
वह जीवन भर वहीं खड़ा रह जाता है।
✍️ लेखनाधिकार सुरक्षित: डॉ. नीरू मोहन
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