Thursday, 28 May 2026

शिकायतों से आगे , कविता

 शिकायतों से आगे


संघर्ष और शिकायतें

कभी खत्म नहीं होतीं…

बस उम्र के साथ

उनके चेहरे बदल जाते हैं।


बचपन में खिलौनों की जिद थी,

युवावस्था में सपनों की दौड़,

और अब…

मन को सुकून चाहिए।


जिसके पास कुछ नहीं,

वो पाने की शिकायत करता है,

और जिसके पास सब कुछ है,

वो खोने से डरता है।


ज़िंदगी की किताब में

हर पन्ने पर कोई अधूरी चाह लिखी है,

इसलिए शायद

हर इंसान थोड़ा परेशान दिखता है।


कभी लोग नहीं समझते,

तो शिकायत होती है…

कभी अपने बदल जाते हैं,

तो दिल चुपचाप रोता है।


लेकिन मैंने देखा है…

जो लोग संघर्षों से लड़ना सीख जाते हैं,

वो शिकायतों में

अपना समय बर्बाद नहीं करते।


क्योंकि उन्हें पता होता है

कि आँधियाँ हमेशा नहीं रहतीं,

और अंधेरी रातों के बाद

सुबह जरूर आती है।


इसलिए अब मैंने

शिकायतें कम कर दी हैं…

क्योंकि जिंदगी को

रोकर नहीं,

हंसकर जीना ज्यादा सुंदर लगता है।


✍️ लेखनाधिकार सुरक्षित: डॉ. नीरू मोहन

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