दुनिया हमेशा सलाह देगी।
कोई कहेगा — “ये मत करो…”
कोई बोलेगा — “लोग क्या कहेंगे?”
तो कोई तुम्हारे सपनों को अपनी सोच की सीमाओं में बाँधने की कोशिश करेगा।
लेकिन सच यही है कि
अगर जीवन में अपनी पहचान बनानी है,
तो फैसले भी अपने लेने पड़ते हैं।
हर बड़ा इंसान कभी न कभी अकेला पड़ा है,
क्योंकि उसने भीड़ की नहीं,
अपने मन की सुनी थी।
दूसरों की राय सुनना गलत नहीं,
लेकिन अपनी सोच खो देना गलत है।
क्योंकि जब सफलता मिलती है,
तो लोग सिर्फ परिणाम देखते हैं,
संघर्ष और साहस नहीं।
जीवन आपका है,
तो दिशा भी आपकी होनी चाहिए।
गलतियाँ होंगी, ठोकरें भी लगेंगी,
लेकिन उन ठोकरों से मिली सीख
आपको और मजबूत बनाएगी।
याद रखिए —
दूसरों के फैसलों पर चलकर
आप शायद सुरक्षित रह सकते हैं,
लेकिन अपनी पहचान नहीं बना सकते।
जो लोग इतिहास लिखते हैं,
वे अक्सर वही होते हैं
जो अपने फैसलों पर भरोसा करना जानते हैं।
इसलिए…
अगर नाम बनाना है,
तो अपने सपनों की आवाज़ सुनिए,
अपने फैसलों पर विश्वास रखिए
और आगे बढ़िए।
क्योंकि
भीड़ रास्ते पर चलती है,
लेकिन रास्ते बनाने वाले
अपने निर्णय खुद लेते हैं।
✍️ लेखनाधिकार सुरक्षित: डॉ. नीरू मोहन
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