Saturday, 23 May 2026

रिमोट कंट्रोल Remote control 🛂

 शीर्षक: “रिमोट कंट्रोल”

स्कूल की घंटी बजी ही थी कि पूरी क्लास में फुसफुसाहट फैल गई—

“आज फिर कुछ होने वाला है…”

कक्षा 10 का माहौल पिछले कुछ दिनों से अजीब था। छोटे-छोटे झगड़े, ताने, दूरी… और इन सबके बीच एक चेहरा हमेशा शांत—आर्यन।

आर्यन कभी किसी से सीधे नहीं लड़ता था। उसकी खासियत थी—लोगों को “चलाना”। जैसे कोई टीवी रिमोट से चैनल बदलता है, वैसे ही वह लोगों के दिमाग बदल देता था।

एक दिन उसने सिया से कहा—

“तुम्हारी बेस्ट फ्रेंड नंदिनी… तुम्हारे पीछे तुम्हारा मज़ाक उड़ाती है।”

सिया चौंकी—“नंदिनी? वो तो मेरी जान है!”

आर्यन मुस्कुराया—“मैं तो बस बता रहा हूँ… बाकी तुम समझदार हो।”

उधर, उसने नंदिनी से कहा—

“सिया कह रही थी कि तुम सिर्फ उसकी परछाईं हो… खुद कुछ नहीं।”

दोनों के दिल में हल्की-सी दरार पड़ गई।

और बस… आर्यन को इतना ही चाहिए था।

झगड़ा—जो उनका नहीं था

अगले दिन क्लास में अचानक बहस शुरू हो गई।

“तुमने ऐसा कैसे कह दिया?” — सिया चीखी।

“पहले तुमने कहा!” — नंदिनी ने जवाब दिया।

दोस्ती, जो सालों से बनी थी… कुछ मिनटों में बिखर गई।

पूरी क्लास तमाशा देख रही थी।

और पीछे बैठा आर्यन… मुस्कुरा रहा था।

लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं हुई…

क्लास का सबसे शांत लड़का—विवेक—सब देख रहा था।

उसे कुछ गड़बड़ लग रही थी।

उसने दोनों को अलग-अलग बुलाया और बस एक सवाल पूछा—

“तुमने खुद सुना था… या किसी ने बताया?”

दोनों चुप।

फिर विवेक ने एक छोटा-सा प्रयोग किया।

उसने जानबूझकर आर्यन के सामने कहा—

“सुना है, आर्यन प्रिंसिपल के बारे में कुछ गलत बोल रहा था…”

जैसा उम्मीद था—कुछ ही देर में यही बात प्रिंसिपल तक पहुँच गई।

अब आर्यन के चेहरे का रंग उड़ गया।

सच का सामना

प्रिंसिपल के सामने जब बात खुली, तो आर्यन समझ गया—

“आज रिमोट किसी और के हाथ में था…”

सिया और नंदिनी को भी सच समझ आ गया।

वे एक-दूसरे को देखने लगीं—आंखों में पछतावा था।

“हम किसी और की बातों में आकर… अपनी दोस्ती तोड़ बैठे…” — सिया बोली।

अंत—एक सख्त सीख

उस दिन के बाद क्लास में एक नियम बन गया—

“जो बात सामने नहीं कही जा सकती, वो सच नहीं मानी जाएगी।”

और आर्यन?

अब भी वही था… लेकिन उसका “रिमोट कंट्रोल” सबने छीन लिया था—

सवाल पूछकर, सच जांचकर, और खुद सोचकर।

सीख (Moral):

हर मुस्कुराता चेहरा सच्चा नहीं होता।

कुछ लोग खुद नहीं लड़ते—वे दूसरों को “रिमोट” से चलाते हैं।

जो सुना है, उसे सच मानने से पहले परखना जरूरी है।

किसी और के जाल में फंसना नहीं, उसे पहचानना सीखो।

✍️ लेखनाधिकार सुरक्षित: डॉ. नीरू मोहन

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