मेट्रो की रफ़्तार
शहर की धड़कन, मेट्रो की चाल,
सपनों को देती नई उड़ान।
भीड़ भरे इस जीवन में,
बन जाती है सुकून की पहचान।
पटरी पर दौड़ती रौशनी सी,
हर चेहरे में उम्मीद जगाए।
थके कदमों को राह दिखाकर,
मंज़िल तक मुस्काकर ले जाए।
न शोर यहाँ, न कोई दूरी,
सबको साथ सफ़र कराती।
दिल्ली की धड़कन बनकर ये,
हर दिन नई कहानी सुनाती।
✍️ लेखनाधिकार सुरक्षित: डॉ. नीरू मोहन
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