मस्ती की पाठशाला 🌈
मस्ती की है पाठशाला,
हँसी-खुशी का है उजियाला।
गीतों संग हम पढ़ने जाएँ,
सपनों को रंगीन बनाएँ।
कभी कहानी, कभी पहेली,
कभी उड़ती तितली अलबेली।
खेल-खेल में सीखें बातें,
ज्ञान बने मीठी सौगातें।
न कोई डर, न कोई बोझ,
हर दिन मिलता नया खोज।
मित्रों संग जब समय बिताएँ,
मन के फूल खुशी से गाएँ।
शिक्षक भी मुस्काकर बोलें,
अच्छे संस्कारों के मोती खोलें।
ऐसी प्यारी हो हरशाला,
जहाँ प्रेम हो और खुशहाला।
✍️ लेखनाधिकार सुरक्षित: डॉ. नीरू मोहन
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