“भाषा सीखो, संस्कृति से जुड़ो, भविष्य संवारो”
भाषा है जीवन की पहचान,
इसी में बसता ज्ञान महान।
शब्दों से बनते भाव अनेक,
इसी से मिलते रिश्तों के नेक।
मातृभाषा जड़ से जोड़ती है,
संस्कृति को आगे मोड़ती है।
सीखो इसे तुम मन लगाकर,
बढ़ो सदा आगे मुस्काकर।
ज्ञान बढ़े, सम्मान मिले,
भविष्य के सब द्वार खुले।
भाषा से ही जीवन सजे,
इंसानियत का दीप जले।
✍️ लेखनाधिकार सुरक्षित: डॉ. नीरू मोहन
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