सिर्फ़ तेरा साथ
ना सोने की चाहत थी,
ना चाँदी का कोई ख्वाब था,
इस भागती हुई दुनिया में
बस तेरा साथ ही लाजवाब था।
जब जीवन की राहों में
धूप बहुत तीखी हो जाती है,
तब किसी अपने की छाँव ही
पूरी दुनिया बन जाती है।
ना बड़े महलों की इच्छा थी,
ना ऊँचे नाम की कोई प्यास,
बस इतना भर काफी था—
मेरे हाथों में तेरा हाथ।
जब अग्नि को साक्षी मानकर
हमने कुछ वचन निभाने चाहे,
तब समझ आया, रिश्ते केवल
शब्दों से नहीं, विश्वास से बंधते हैं।
समय के संग चेहरे बदलेंगे,
बालों में चाँदी उतर आएगी,
पर यदि साथ बना रहा तेरा,
तो हर उम्र मुस्कुराएगी।
जीवन कोई फूलों की सेज नहीं,
यहाँ काँटे भी मिलते हैं,
पर दो लोग साथ चलें तो
रास्ते आसान लगते हैं।
ना तू पूर्ण, ना मैं पूर्ण,
फिर भी यह बंधन खास है,
क्योंकि सारी दुनिया से बढ़कर
मुझे सिर्फ़ तेरा साथ है।
जब तक साँसों की डोर चले,
जब तक यह जीवन साथ रहे,
हर प्रार्थना में बस यही माँगूँ—
तेरा विश्वास मेरे पास रहे।
दुनिया चाहे जो भी दे दे,
या मुझसे सब कुछ छीन ले,
मेरी सबसे बड़ी दौलत तो
सिर्फ़ तेरा साथ ही रहे।
✍️ लेखनाधिकार सुरक्षित: डॉ. नीरू मोहन
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