1. मुश्किलें रास्ता रोकती नहीं, रास्ता बनाना सिखाती हैं।
जो गिरकर संभल जाता है, वही मंज़िल तक पहुँच पाता है।
2. समय और संघर्ष कभी व्यर्थ नहीं जाते,
ये इंसान को उसकी असली पहचान दिलाते हैं।
3. हार से मत घबराओ, हार तो एक सबक है,
जीत उसी की होती है, जिसके इरादे अटल हैं।
4. अंधेरों से लड़ने का हौसला रखो,
सूरज बनने का अवसर स्वयं मिल जाएगा।
5. कर्म की राह पर चलते रहो निरंतर,
किस्मत भी एक दिन तुम्हारे दर पर दस्तक देगी।
6. जो अपने दर्द को ताकत बना लेता है,
वह हर तूफान से आगे निकल जाता है।
7. सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं होता,
मेहनत ही हर मंज़िल की असली सीढ़ी होती है।
8. वक्त बदलते देर नहीं लगती,
इसलिए हिम्मत कभी मत बदलना।
9. संघर्ष जितना कठिन होगा,
सफलता का स्वाद उतना ही मधुर होगा।
10. खुद पर विश्वास रखो,
दुनिया का हर बड़ा सफर एक छोटे कदम से शुरू होता है।
1. समय पर
डॉ. नीरू मोहन कहती हैं—
वक्त की रेत मुट्ठी में कहाँ ठहरती है,
जो इसकी कद्र करे, मंज़िल उसी से सँवरती है।
2. रिश्तों पर
डॉ. नीरू मोहन कहती हैं—
रिश्ते शब्दों से नहीं, संवेदनाओं से निभाए जाते हैं,
जो दिल में बसते हैं, वे दूर होकर भी पास नज़र आते हैं।
3. संघर्ष पर
डॉ. नीरू मोहन कहती हैं—
ठोकरों ने ही चलना सिखाया है मुझे,
वरना मंज़िल का रास्ता कौन बताता मुझे।
4. अपेक्षा और उपेक्षा पर
डॉ. नीरू मोहन कहती हैं—
अपेक्षाएँ जब हद से बढ़ जाती हैं अक्सर,
उपेक्षाओं की चुभन भी उतनी ही गहरी होती है।
5. आत्मविश्वास पर
डॉ. नीरू मोहन कहती हैं—
आईनों से नहीं, अपने हौसलों से पहचान बनती है,
भीड़ में नहीं, अपने कर्मों से शान बनती है।
6. जीवन पर
डॉ. नीरू मोहन कहती हैं—
जीवन की किताब में हर पन्ना जरूरी होता है,
कुछ सिखाने के लिए, कुछ सँवारने के लिए।
7. मौन पर
डॉ. नीरू मोहन कहती हैं—
हर सवाल का जवाब शब्दों में नहीं मिलता,
कभी-कभी मौन भी बहुत कुछ कह जाता है।
8. यथार्थ पर
डॉ. नीरू मोहन कहती हैं—
चेहरों की भीड़ में सच कम ही मिलता है,
हर मुस्कान के पीछे एक संघर्ष पलता है।
9. स्त्री शक्ति पर
डॉ. नीरू मोहन कहती हैं—
वो सिर्फ़ घर नहीं, संसार सजाती है,
अपनी पीड़ा छुपाकर सबको हँसाती है।
10. स्वाभिमान पर
डॉ. नीरू मोहन कहती हैं—
झुकना संस्कार है तो झुकिए अवश्य,
पर स्वाभिमान बिके, इतना भी मत झुकिए।
1. रिश्तों पर
रिश्तों की डोर प्रेम से हर पल मजबूत होती है,
स्वार्थ की आँधी आए तो अक्सर कमजोर होती है।
अपनेपन की छाँव में खिलता है हर इंसान,
कहे नीरू, प्रेम से ही बसता है परिवार।
2. बुज़ुर्गों के सम्मान पर
जिन हाथों ने थामकर चलना हमें सिखाया है,
उन्हीं हाथों को अक्सर वक्त ने तन्हा पाया है।
उनके अनुभव में छिपा है जीवन का सार,
कहे नीरू, बुज़ुर्ग हैं घर का सच्चा आधार।
3. नारी सम्मान पर
नारी से ही सृष्टि का सुंदर विस्तार है,
उसके बिना जीवन का हर रंग बेकार है।
सम्मान दो उसे, यही मानवता का मान,
कहे नीरू, नारी से ही महके संसार।
4. पर्यावरण पर
पेड़ों की छाँव में जीवन का संगीत बसता है,
हरियाली से ही धरती का सौंदर्य हँसता है।
प्रकृति की रक्षा करना हम सबका अधिकार,
कहे नीरू, हर पौधा है जीवन का उपहार।
5. सामाजिक एकता पर
भाषाएँ हों अलग मगर दिलों में प्यार रहे,
धर्म कोई भी हो, मानवता का विचार रहे।
मिल-जुलकर चलने में ही जीवन का सम्मान,
कहे नीरू, एकता से बनता है देश महान।
6. शिक्षा पर
ज्ञान का दीपक जब हर घर में जल जाएगा,
अज्ञान का अंधियारा खुद ही मिट जाएगा।
शिक्षा से ही खुलते हैं उन्नति के द्वार,
कहे नीरू, विद्या है जीवन का श्रृंगार।
✍️ लेखनाधिकार सुरक्षित: डॉ. नीरू मोहन
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