"कहे नीरू : रंगीला राजस्थान"
आल्हड़ धूप में सुनहरी है रेगिस्तान की बात,
राजस्थानी परिधान में बसी है शान की सौगात।
घूमर की लय पर थिरकती संस्कृति की पहचान,
हर रंग में झलकता है राजस्थान का सम्मान।
कुम्भलगढ़ की दीवारें कहती हैं वीरों की कहानी,
मेवाड़ की धरती गाती है राणा की अमर निशानी।
जैसलमेर का सोनार किला सूरज सा दमकता है,
हर पत्थर इतिहास का कोई पन्ना पढ़ता है।
पगड़ी की आन में बसता है स्वाभिमान पुराना,
घाघरे की लहरों में सिमटा है रंगों का खज़ाना।
कठपुतली की बोली हो या मांड की मधुर तान,
हर सुर में गूँजता है मेरा प्यारा राजस्थान।
दाल-बाटी की खुशबू से महक उठे हर द्वार,
अतिथि को देव मानना यहाँ का है संस्कार।
मरुधर की मिट्टी भी देती जीवन का ज्ञान,
कहे नीरू, सादगी में बसता है राजस्थान।
✍️ लेखनाधिकार सुरक्षित: डॉ. नीरू मोहन
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