Tuesday, 9 June 2026

खुद को व्यस्त रखो कविता

 शीर्षक: "खुद को व्यस्त रखो"


खुद को इतना व्यस्त रखो,

कि फुर्सत भी तुमसे मिलने का समय माँगे।


कुछ पढ़ो, कुछ लिखो,

कुछ सीखो, कुछ सिखाओ,

हर दिन अपने कल से

एक कदम आगे निकल जाओ।


दुनिया क्या कहती है,

इस पर समय मत गँवाओ,

दुनिया का काम कहना है,

तुम अपना काम करते जाओ।


जो लोग खाली बैठे हैं,

वो किस्मत को कोसते हैं,

जो खुद को काम में झोंक देते हैं,

वो इतिहास लिखते हैं।


जब मन टूटे तो कलम उठा लेना,

जब हौसला डगमगाए तो किताब उठा लेना,

जब रास्ते बंद नज़र आएँ,

तो नया रास्ता बना लेना।


याद रखो—

सफलता शोर मचाने वालों को नहीं,

लगातार चलते रहने वालों को मिलती है।


इसलिए खुद को इतना व्यस्त रखो,

कि नकारात्मकता तुम्हारे दरवाज़े तक आए,

और लौटकर चली जाए।


✍️ लेखनाधिकार सुरक्षित: डॉ. नीरू मोहन

No comments:

Post a Comment