Friday, 22 May 2020

हम मजदूर हैं … हमारे पास व्यवहार की दौलत है ।

हम मजदूर हैं … हमारे पास व्यवहार की दौलत 

आज फिर ठेकेदार नहीं आया । कोई भी मजदूर ढंग से काम ही नहीं कर रहा । ठेकेदार होता है तो किसी के हाथ पैर नहीं रुकते चाय भी तीन टाइम चाहिए और साथ में नाश्ता पानी भी । इस ठेकेदार से ठेका वापिस ले लेता हूं किसी दूसरे को देता हूं । नुकसान ही तो उठाना पड़ेगा । देखो तो ज़रा 7 दिन हो गए कोई खेर खबर ही नहीं है ।   ये एक 1 साल के काम को 2, 3 साल लगा देगा । 
कहते हुए सूरज सभी मजदूरों पर भड़क रहा था । 7 दिन हो गए थे सूरज को यूं ही मजदूरों पर भड़कते हुए । 
आज किसी को चाय नाश्ता नहीं मिलेगा । सारा समय बीड़ी फूकने और  चाय पानी में ही लगा देते हो । काम तो 2, 3 धंटे ही करते हो दिहाड़ी पूरे दिन की चाहिए ।
मजदूर गिरधारी को सूरज की बात सुनकर गुस्सा आ जाता है । साहब ऐसे मत कहिए । काम और मेहनत की रोटी खाते हैं । आप खुद ही देखिए कितनी ठंड पड़ रही है । दस माले तक मेरी मेहरारू, बालक और ये मजदूर ईंट सीमेंट चढ़ाते हैं । ट्रक वाला तो रात को बाहर सड़क पर ही छोड़ जाता है आज सुबह 5 बजे तक सारा सामान सड़क से अंदर तक डाल है अभी ऊपर भी चढ़ाना है । बच्चों का खेल थोड़ी ना है ठंड में हाथ सुन हो जाते हैं । आप तो साहब हैं ना आपको क्या पता ?  साहब हमारी मेहनत पर यूं पानी ना फेरो । 
सूरज तिलमिलाकर काम करते हो तो पैसे भी लेते हो मुफ़्त में थोड़ी न करते हो ।
गिरधारी दुखी मन से , हां साहब हम मजदूर है न इसीलिए आपका हक बन ही जाता है हमें कुछ भी कहने का । हम भी आपकी तरह पढ़े - लिखे होते तो हम भी आपकी तरह बाबू सेठ होते । हमारा तो नसीब ही यही है दूसरों के घरोंदे बनाते हैं और अपना ठोर ठिकाना ही नहीं है । जब से गांव से आए हैं खानाबदहोश की तरह घूमते रहते हैं जहां काम मिल जाता है वहीं डेरा डाल लेते हैं । बाकी ठेकेदार की मेहर । 
गिरधारी की बात अनसुनी करते हुए सूरज फोन सुनने लगता है । अरे ठेकेदार साहब कहां गुम हो गए आप , 7 दिनों से कोई खेर खबर ही नहीं , साइट पर भी सभी अपनी मनमानी कर रहे हैं ।भाई ऐसे तो काम नहीं चलेगा काम करना है तो सही तरह करो नहीं तो मैं ठेका वापिस ले लूंगा, बहुत है अभी भी काम को लेने वाले । मैंने तो आपसदारी देखी मगर अब क्या कर सकता हूं ?
अब बताओ कहां हो ?
सूरज साहब मैं जयपुर में फंसा हूं आपको तो पता है कोरोना अब भारत में भी आ गया है यहां आवाजाही बिलकुल बंद हो गई है । सुनाई में आ रहा है कि सभी जगह लॉक डाउन हो गया है ।
आप ऐसा करिए मेरे मजदूरों को 7 दिन की दिहाड़ी दे दो बेचारे समय रहते अपने - अपने घर तो पहुंच ही जाएंगे ।150 रुपए रोज के हिसाब से एक मजदूर की 7 दिन की दिहाड़ी 1050 रुपए बनती है आप 1500 - 1500 सभी को दे देना इनकी थोड़ी मदद ही हो जाएगी । बाकी हिसाब आकर करता हूं यहां का माहौल देखकर निकालने की कोशिश करता हूं ।
सूरज ठीक है कहते हुए फोन काट देता है । गिरधारी सभी से कह दो काम बंद कर देंगे । आज से अभी काम बंद रहेगा सरकार का ऐलान किया है कि सभी काम धंधे covid १९ के चलते अभी बंद रहेंगे । सभी अपनी 7 दिन की दिहाड़ी लेे लो और साइट खाली कर दो ।
सूरज सभी को 1500 की जगह 1000 रुपए देकर कहता है कि 50 रुपए चाय पानी के काट लिए । गिरधारी मन में … गरीबों की मेहनत का पैसा लेकर कितना भर लेगा सभी यहीं पर रह जाना है । 
गिरधारी मजदूरों से , अपना अपना डेरा हटाओ और सामान बांधो ।
रामू मजदूर गिरधारी से कहता है कि अब वह कहां जाएंगे । गिरधारी कहता है गांव ही चलते है पता नहीं कब तक का बंद हो । सभी मान जाते हैं । सूरज अपनी गाड़ी में बैठकर निकाल जाता है ।
गिरधारी मन ही मन शहर के पैसे वाले लोग कितने रूखे होते हैं मदद तो करने से रहे मजदूरों का भी पैसा खा जाते हैं चलों अपना - अपना व्यवहार ।
सभी 20 मजदूर एक साथ हो लेते हैं जिसमें महिलाएं और बच्चे भी हैं । कुछ दूरी पर भीड़ दिखाई देती है गाड़ी तो सूरज साहब की लग रही है गिरधारी कहता है । रामू   ये तो सूरज साहब की ही गाड़ी है नज़दीक जाकर भीड़ को हटाते हुए । अरे ये तो अपने सूरज साहब हैं । खून से लथपथ दर्द से तड़पता सूरज थोड़े होश हवास में सड़क पर पड़ा है कोई उसकी मदद के लिए आगे नहीं आ रहा । गिरधारी सूरज को अपने मजदूर भाइयों की मदद से अस्पताल तक पहुंचता है और उसके घर ख़बर कर देता है । सूरज कुछ बोल नहीं पा रहा है परन्तु आंखो ही आंखों में गिरधारी और अन्य मजदूरों से मानो माफ़ी मांग रहा है । 

इस कहानी से हमें यह शिक्षा मिलती है कि परोपकरिता ही सबसे बड़ा धर्म और कर्तव्य है । पैसा समाप्त हो जाता है परन्तु दूसरों के साथ किया गया आपका व्यवहार सदैव साथ और याद रहता है इसलिए दूसरों के काम आईए  किसी कि मेहनत का हक छीनकर हम सुख प्राप्त नहीं कर सकते ।

अच्छे बने , अच्छे कर्म करें और दूसरों के काम आएं ।

धन्यवाद 
डॉ नीरू मोहन ' वागीश्वरी '







Wednesday, 20 May 2020

थोक के भाव … covid - 19 अवॉर्ड

थोक के भाव … covid - 19 अवॉर्ड
बिल्कुल फ्री, पहले आओ पहले पाओ …कोविड - 19 बस अब कुछ ही दिनों का है उम्मीद बांधी यही हुई है उसके बाद नहीं मिलेगा मौका । आलू , प्याज , टमाटर , गोभी , धनिया नहीं मिलेगा आज मेरी रेहड़ी पर मिलेगा कोविड 19 कर्मवीर योद्धा, रक्षक, जागरूक अनेकों अवॉर्ड । आइए ले जाइए एक नहीं दो नहीं जितने आप चाहे बिल्कुल फ्री भीकू शहर की गलियों में अपनी रेहड़ी लिए यही आवाज लगा रहा था ।
यह तो शहर है यहां तो मुफ़्त की चीज़ के लिए भीड़ लगा ही लेते है लोग । सरकार ने लॉक डाउन 4.0 में छूट क्या दे दी लोग देखो अपने घर छोड़ गलियों और सड़कों पर दिख रहे हैं कुछ ही पल में उसकी रेहड़ी के चारों तरफ भीड़ लग जाती है ।
 पहला आदमी - भैया भीकू आज सब्ज़ी तरकारी की जगह ये क्या लेे आए ?
दूसरा आदमी - इसे कोन लेगा , इस कागज़ के टुकड़े का क्या काम ?
तीसरा आदमी - अरे हां भीकू तुम्हें इससे क्या फायदा मुफ़्त में देकर तुम्हें क्या मिलेगा ?
भीकू - साहब केसी बात करते हो इन अवॉर्ड्स के लिए तो लोग तरसते हैं कोविद -19 में इनकी बहुत डिमांड है । इसको फ्रेम कराकर घर पर लगाना फिर देखना लोग बिना कुछ करे कैसे सलाम ठोकते हैं ।
दूसरा आदमी - अरे वाह भीकू ! अच्छा तो चलो मुझे ये कोविड़ योद्धा, कर्मवीर, सेवानिष्ठ , जागरूक और एक कोई भी अपनी पसंद का निकाल दो । 
भीकू - बाबूजी ये अभी नहीं मिलेगा ये तो अभी डिस्प्ले के लिए हैं । अपना नाम, पता, फोन नंबर ,एक सुंदर - सी फोटो काम धंधा सब की जानकारी दे दो । दो चार दिन लगेंगे घर बैठे ही मिल जाएगा ।
पहला आदमी - घर बैठे ही कैसे, तुम्हें सब के घर कैसे पता चलेगी । 
पहली महिला - अरे , पागल बना रहा है ये ।
भीकू - बहन जी पागल क्यों बनाऊंगा ? आपसे कोई पैसे थोड़ी न ले रहा हूं । बिना कुछ सेवा किए आपको अवॉर्ड मिल रहा है और क्या चाहिए । आंखे खोलकर देखो तो हमारे देश में अस्पतालों में डॉक्टर और नर्स , सड़कों पर पुलिस कर्मी , गुरुद्वारों में सच्चे सेवक रात दिन सेवा कर रहे हैं  हमारे देश के अन्य सहयोगी वर्ग, समाजसेवी, शिक्षक जो सच्ची सेवा में लगे हैं अवार्ड तो उनको मिलना चाहिए ।
मेरा बस चलता न तो मैं ये सभी अवॉर्ड उन्हीं सच्चे सेवकों को देता ।
तीसरा आदमी - अरे छोड़ो बहनजी लेना है तो लो न , बहस मत करो अभी भीड़ देखकर पुलिस वाले आ जाएंगे । अभी कोरिना ख़तम नहीं हुआ है सिर्फ़ लॉक डाउन में ढील दी गई है । 
दूसरी महिला - अरे भैया ये अवॉर्ड क्या कोई भी के सकता है ।
भीकू - हां बहनजी कोई भी ।

सफेद कोट पहने रेहड़ी से भीड़ को हटाती हुई एक महिला ।

ये क्या यहां भीर क्यों लगा रखी है ? सभी पढ़े - लिखे हो लॉक डाउन 4.0 चल रहा है । तुम सभी को और सतर्क रहना चाहिए । माना सरकार ने बाज़ार खोल दिए हैं मगर सावधानी अपनाने को माना नहीं किया । तुम किसी ने भी मास्क नहीं लगाया और ना ही दस्ताने पहने हैं । और तुम ये रेहड़ी हटाओ । न तुम्हारी रेहड़ी पर सब्ज़ी है न तरकारी न अन्य कोई घरेलू सामान फिर भीड़ किस बात की ।
भीकू - मैडम जी अवॉर्ड हैं आपका भी लिस्ट में नाम लिख दूं ।
सफेद  कोट वाली महिला -  नहीं भाई मुझे अवॉर्ड देना है तो अपनी रेहड़ी हटा लो बेकार की भीड़ मत इकट्ठी करो । मैं एक नर्स हूं सेवाभाव बिना स्वार्थ के करती हूं यही मेरा कर्म, धर्म दोनों है । मेरे मरीज़ ठीक हो जाएं कोरोना देश से बाहर हो जाए । मेरे लिए यही अवॉर्ड है । 
तुम इन लोगो को ही अवॉर्ड दो जो समझदार होते हुए भी शान से भीड़ लगाए अवॉर्ड पाना चाहते हैं । 

भीकू सफेद कोट वाली मैडम की बात सुनते ही अपनी रेहड़ी को 100 की रफ्तार से लिए चला जा रहा है और सड़क के किनारे एक लकड़ी के बने ऑफिस के पास जाकर रोक देता है । 
ये लो साहब अपने मुफ़्त के अवॉर्ड मुझे नहीं चाहिए तुम्हारी 200 रुपए की दिहाड़ी का काम । मेरी रेहड़ी पर सब्जी ही बिकती अच्छी लगती है ।
और हां मेरी ओर से एक निवेदन है कि अवॉर्ड उन्हें दीजिए जो इसके सच्चे हकदार हैं कहते हुए भीकू रेहड़ी से सारा सामान उतारकर ऑफिस के बाहर रखकर रेहड़ी लिए आगे बढ़ जाता है ।

संदेश कहानी में ही निहित है कि किसी भी सम्मान का हकदार वही व्यक्ति है जिससे सम्मान संबंधित है । दूसरों को सम्मानित करने की सच्ची भावना तभी सफल है जब सही व्यक्ति को सम्मान मिले ।
 देश दे उन कर्मवीरों और सच्चे योद्धाओं को मेरी ओर से सलाम और सम्मान जो दिन - रात सेवाभाव से निस्वार्थ सेवा कर रहे हैं । जो सही रूप से सच्चे वॉरियर्स हैं । उन सभी को करबद्ध नमन !
डॉ नीरू मोहन ' वागीश्वरी '