Saturday, 1 August 2026

जब मैं मरकर वापस आई

 जब मैं मरकर वापस आई


जिस दिन मैं मरी, उस दिन पहली बार मेरे घर में इतनी भीड़ थी।


जिन रिश्तेदारों को मेरे जीते-जी मेरा पता याद नहीं था, वे सबसे आगे खड़े होकर रो रहे थे। पड़ोसन, जो हर सुबह मेरी बुराई से अपनी चाय मीठी करती थी, आज कह रही थी—

"बहुत नेक औरत थी... भगवान ऐसी आत्मा सबको दे।"


मैं ऊपर खड़ी सब देख रही थी।


यमदूत बोले, "चलो, समय हो गया।"


मैंने कहा, "बस पाँच मिनट... देख लूँ, मेरे जाने के बाद कौन कितना दुखी है।"


उन्होंने मुस्कुराकर इजाज़त दे दी।


सबसे पहले मेरी अलमारी खुली।


आँसू पोंछते-पोंछते लोग गहनों का हिसाब लगाने लगे।

बेटा बोला, "माँ ने किसे क्या लिखा है?"

बेटी बोली, "पहले लॉकर की चाबी ढूँढ़ो।"


पति, जो जीते-जी कभी चाय तक नहीं बना पाए थे, अब रिश्तेदारों के सामने सुबकते हुए कह रहे थे—

"मेरे जीवन की सबसे बड़ी पूँजी चली गई..."


और पाँच मिनट बाद वही धीरे से पूछ रहे थे—

"खाना कितने लोगों का बनवाना है?"


मैंने पहली बार समझा...

मौत से बड़ा आयोजन, मौत के बाद की व्यवस्थाएँ होती हैं।


तभी मोबाइल बजने लगे।


एक ने मेरी फोटो पर काली पट्टी लगाई।

दूसरे ने लिखा—

"ओम् शांति... जीवन का कोई भरोसा नहीं।"


तीसरे ने पोस्ट डालते ही नीचे लिखा—

"वैसे मेरी नई रील भी देख लेना।"


मैं हँसी भी और रोई भी।


तभी यमराज बोले,

"चलो, अब सच जान लिया?"


मैंने कहा,

"नहीं प्रभु... एक कमरा अभी बाकी है।"


वहाँ मेरी बूढ़ी माँ अकेली बैठी थीं।


उनके पास न मोबाइल था,

न श्रद्धांजलि का भाषण,

न कैमरा।


बस मेरी बचपन की फ्रॉक सीने से लगाकर इतना ही कह रही थीं—


"बेटी... एक बार आ जा।"


उस एक वाक्य ने मेरी पूरी आत्मा हिला दी।


शायद पहली बार समझ आया कि दुनिया में सबसे सच्चा शोक वही करता है,

जिसने आपको सचमुच जिया हो।


इतने में ऊपर से आवाज़ आई—


"गलती हो गई...

जिसे लाना था, वह दूसरी गली में रहती थी।

तुम्हारी उम्र अभी बाकी है।"


और अगले ही पल...


मैं अस्पताल के बिस्तर पर आँखें खोल चुकी थी।


सब मुझे देखकर खुश थे।


लेकिन मैं बदल चुकी थी।


अब मैंने लोगों की बातों पर नहीं,

उनके व्यवहार पर विश्वास करना शुरू किया।


अब मैं हर दिन ऐसे जीती हूँ,

मानो मौत अभी दरवाज़े पर खड़ी हो।


क्योंकि...


मरकर वापस आने से मैंने यही सीखा—

इंसान की असली कीमत उसके मरने पर नहीं, उसके जीते-जी दिए गए सम्मान से तय होती है।

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