“हर मुस्कुराता चेहरा मज़बूत नहीं होता… कुछ चेहरे सिर्फ दर्द छिपाना जानते हैं।”
हर बार मज़बूत होना ज़रूरी नहीं
कभी-कभी हम सबको संभालते-संभालते खुद को संभालना भूल जाते हैं।
हर किसी की चिंता, हर रिश्ते की ज़िम्मेदारी और हर चेहरे की मुस्कान के पीछे छिपी अपनी थकान… धीरे-धीरे मन को भीतर से खाली करने लगती है।
हम हमेशा मज़बूत रहें—यह ज़रूरी नहीं।
कभी रुक जाना भी ज़रूरी है, कभी चुप होकर अपने मन की सुनना भी ज़रूरी है।
हर आँसू कमजोरी नहीं होता।
कुछ आँसू उन भावनाओं का बोझ हल्का करते हैं, जिन्हें हम बरसों से मुस्कान के पीछे छिपाए बैठे हैं।
इसलिए आज खुद से एक वादा कीजिए—
दुनिया को समझने से पहले खुद को समझेंगे।
सबका साथ देने से पहले खुद का हाथ थामेंगे।
क्योंकि जिंदगी सिर्फ दूसरों के लिए मजबूत बने रहने का नाम नहीं…
कभी-कभी अपने लिए भी सहारा बनना पड़ता है।
याद रखिए—
आपको हर दिन मजबूत दिखना नहीं है,
बस हर दिन खुद के साथ सच्चा रहना है।
©️ डॉ. नीरू मोहन
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