शीर्षक: "तीज का झूला और दिखावे की दुनिया"
सावन की पहली फुहार पड़ी तो गाँव की गलियाँ हरी चूड़ियों की खनक से भर उठीं। हर तरफ मेहंदी की खुशबू, झूलों की पींग और गीतों की मिठास थी।
गाँव की दादी बोलीं—
"तीज तो वो पर्व है बिटिया, जिसमें श्रृंगार से ज्यादा संस्कार सजते हैं।"
लेकिन अब तीज भी समय के साथ बदल गई थी।
गाँव की सीमा ने जैसे ही मोबाइल खोला, देखा—
"तीज स्पेशल प्रतियोगिता!
सबसे सुंदर साड़ी, सबसे महंगी ज्वेलरी और सबसे शानदार मेहंदी वाली महिला को मिलेगा पुरस्कार!"
सीमा मुस्कुराई और बोली—
"वाह! अब तो सुहाग की लंबी उम्र की प्रार्थना भी शायद ब्रांडेड साड़ी पहनकर ही स्वीकार होगी!"
पास बैठी उसकी सास हँस पड़ीं।
बोलीं—
"हमारे समय में तीज पर बहू के हाथों की मेहंदी देखी जाती थी, अब तो मेहंदी से ज्यादा मोबाइल कैमरे का एंगल देखा जाता है।"
उधर शहर में रहने वाली रिया ने तीज की तैयारी शुरू कर दी।
उसने पति से कहा—
"सुनो, इस बार तीज पर मुझे लाखों वाली ज्वेलरी चाहिए। पड़ोस की कविता ने पिछले साल इतनी महंगी पहनी थी कि उसकी फोटो पर हजारों लाइक आए थे।"
पति ने धीरे से पूछा—
"लेकिन तुम्हें खुशी किससे मिलेगी? गहनों से या मेरे साथ बिताए समय से?"
रिया थोड़ी देर चुप रही।
फिर बोली—
"समय तो फोटो में दिखाई नहीं देता ना!"
पति मुस्कुराया—
"शायद इसी वजह से आजकल रिश्ते कमजोर और पोस्ट मजबूत हो रहे हैं।"
तीज के दिन मोहल्ले की महिलाओं ने बड़ा आयोजन किया। मंच सजा, कैमरे लगे और घोषणा हुई—
"अब होगी मिसेज तीज प्रतियोगिता!"
एक महिला बोली—
"मेरी साड़ी विदेश से आई है।"
दूसरी बोली—
"मेरी ज्वेलरी असली है।"
तीसरी बोली—
"मेरे मेकअप आर्टिस्ट ने मुझे तीन घंटे में तैयार किया है।"
तभी कोने में बैठी बूढ़ी अम्मा ने अपनी पुरानी हरी साड़ी ठीक करते हुए कहा—
"बेटियों, एक बात पूछूँ?"
सबने उनकी ओर देखा।
अम्मा बोलीं—
"जिस तीज में पत्नी पति की लंबी उम्र की कामना करती थी, वह कब पति की जेब की लंबाई नापने का त्योहार बन गई?"
कुछ पल के लिए सन्नाटा छा गया।
अम्मा ने आगे कहा—
"मैंने भी तीज रखी है। कभी नई साड़ी नहीं मिली, कभी महंगे गहने नहीं मिले। लेकिन मेरे पति ने जब बीमारी में मेरा हाथ पकड़ा, मेरे बच्चों ने जब मेरे माथे पर प्यार से हाथ रखा—वही मेरे लिए सबसे बड़ा श्रृंगार था।"
उनकी आँखों में चमक थी।
"याद रखना बेटियों, तीज का चाँद चेहरे की चमक नहीं, रिश्तों की रोशनी देखता है।"
अगले दिन सोशल मीडिया पर तस्वीरें वायरल थीं।
किसी की साड़ी की चर्चा थी, किसी की ज्वेलरी की।
लेकिन सबसे ज्यादा साझा की जा रही थी अम्मा की एक तस्वीर—
पुरानी हरी साड़ी में मुस्कुराती हुई।
नीचे लिखा था—
"त्योहार कपड़ों से नहीं, भावनाओं से खूबसूरत होते हैं।
जहाँ प्रेम सच्चा हो, वहाँ साधारण साड़ी भी रानी का श्रृंगार बन जाती है।"
और शायद यही तीज का असली संदेश था—
"झूले ऊँचे हों या छोटे, रिश्तों की डोर मजबूत होनी चाहिए।
क्योंकि दिखावे के बाजार में भावनाएँ सबसे कीमती और सबसे कम बिकने वाली चीज़ हैं।"
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