Saturday, 10 February 2018

मैं अभिनेत्री हूं

** मैं अभिनेत्री हूँ **

रंगमंच की शोभा कहलाती ।
नाटक फिल्मों में हूँ आती  ।
जीवन मेरा शूल की शैय्या,
चौबीस घंटे व्यस्त हूँ रहती ।
लोगों का मनोरंजन करती,
तानों को नतमस्तक रखती ।
कास्टिंग काउच की शिकार भी होती,
जीवन जीते फिर भी ऐसे…जैसे झाँसी रानी होती ।

मैं हूँ एक अभिनेत्री,
अभिनय का मैं स्वांग हूँ रचती ।

चेहरे को अपने रंग लेती,
झूठा जीवन मैं हूँ जीती ।
कभी खुशी के भाव दिखाती,
कभी गम के अश्क़ बहाती ।
जीवन की सच्चाई को सबके,
रू-ब-रू मैं हूँ करवाती ।
स्वअस्तित्व को त्याग के अपने,
सबके अस्तित्व को हूँ दर्शाती ।

मैं हूँ एक अभिनेत्री,
अभिनय का मैं स्वांग हूँ रचती ।

कभी कहीं पर माँ बन जाती,
कहीं कभी बन जाती सास ।
बेटी, बहू, बहन किरदार,
किन्नर, वैश्या नटनी, नार ।
सभी पात्रों को हूँ दर्शाती,
पद्मावती कभी बन जाती ।
सभी की सच्ची जीवन गाथा,
पर्दे पर हूँ लेकर आती ।

मैं हूँ एक अभिनेत्री,
अभिनय का मैं स्वांग हूँ रचती ।

कभी पूजी भी जाती हूँ,
कभी दुत्कारी जाती हूँ ।
अच्छे बुरे किरदार से ही मैं,
दिलों पे सबके छाती हूँ ।
कभी नायिका बन जाती,
पात्र खलनायिका मैं कर जाती ।
मगर कभी अपनी सच्चाई,
लोगों को न दिखला पाती ।

मैं हूँ एक अभिनेत्री,
अभिनय का मैं स्वांग हूँ रचती ।

दिखता जो है बिकता वो है,
जीवन मेरा झूठा सच है ।
मन में दर्द समेटे हूँ मैं,
घर मेरा वीरान बहुत है ।
सुंदर हूँ तब तक हूँ मैं बस,
बाद में खोटा सिक्का हूँ ।
बाहर शोर भीतर सन्नाटा,
न मेरी कोई तमन्ना है ।
जीवन मेरा कोरा पन्ना,
ये ही सच बस अपना है ।

मैं हूँ एक अभिनेत्री,
अभिनय का मै स्वांग हूँ रचती।

पेंसिल मेरी बोलती है

** पेंसिल मेरी बोलती है  **

जब मैं कुछ भी लिखती हूँ,
मेरी पेंसिल बोलती है ।

सर-सर, सर-सर आवाज़ है करती,
झट से अक्षर लिख देती है ।

मेरी सोच पहचान है जाती ।
झट कागज पर उतर यह जाती ।

पाठ स्मरण जब करती हूँ,
पास पेंसिल रखती हूँ ।

मेरी सच्ची साथी है यह,
समझ सब यह जाती है ।

हर सत्र में मेरी पेंसिल,
प्रथम स्थान दिलवाती है ।

मेरी हिंदी पुस्तक

** मेरी हिंदी पुस्तक **

मेरी पुस्तक ज्ञान बढ़ाती ।
हिंदी भाषा मुझे सिखाती ।

आ…से अनार और आ…से आदर,
मुझे टीचर है रोज़ पढ़ाती ।

क…से कलम और ख…से खटमल ,
व्यंजन से अक्षर बनवाती ।

पढ़ने में आनंद आता है ।
लिखने से मन हर्षाता है ।

हिंदी पढ़ना अच्छा लगता ।
हिंदी में भावों की रचना ।

मेरी पुस्तक चित्रों वाली ।
रंगीन चित्र की छटा निराली ।

देश इसे मुख खिल जाता है ।
पढ़ने में आनंद आता है ।

लंच बॉक्स

** लंच बॉक्स **

आधी छुट्टी हो गई है,
घंटी भी अब बज गई है ।

मानक खोल ज़रा लंच बॉक्स,
निकाल ले अपना मक्खन टोस्ट ।

मुझको भी वह खाना मानक,
दिया मम्मी ने आज भी पालक ।

मुझे नहीं पालक भाता है,
टोस्ट खाने में स्वाद आता है ।

रोहन यह ले मेरा टोस्ट,
मुझे न भाता मक्खन टोस्ट ।

सब्ज़ी रोटी मुझको भाती,
ऊर्जा देती, रोग भगाती ।

सड़क सुरक्षा जीवन रक्षा

** सड़क सुरक्षा जीवन रक्षा **

खड़ी बीच चौराहे पर,
तीन रंग के साथ अड़ी ।

लाल, हरी और पीली बत्ती,
देती सबको सीख यही ।

सड़क सुरक्षा नियम अपनाकर,
सुरक्षित अपने प्राण करो ।

लाल बत्ती जब हो जाए,
सब वाहन तब रूक जाओ ।

हरी बत्ती के होते ही,
चलना अब तुम शुरू करो ।

पीली जब बत्ती हो जाए,
थोड़ा-सा विश्राम करो ।

हरे, लाल और पीले रंग का,
ध्यान हमेशा सदा रखो ।

जीवन है अनमोल तुम्हारा,
ध्यान सुरक्षा नियम रखो ।

सड़क सुरक्षा जीवन रक्षा,
यही कथन तुम याद रखो ।

सड़क पर चलते हुए हमेशा,
लाल बत्ती का ध्यान रखो ।

मेरी मैडम

** मेरी मैडम **

मेरी मैडम कहती हैं,
रोज़ सुबह जल्दी उठ जाओ ।

स्कूल समय पर तुम जाओ,
अनुशासन पूरा दिखलाओ ।

पढ़ने की है उम्र तुम्हारी,
खेल में तुम न समय गँवाओ ।

जीवन पथ नहीं सरल है,
डगर पे इसकी शूल बहुत हैें ।

बाधाएँ जब रोकें सत् पथ,
आत्मविश्वास मन में लाओ ।

ज्ञान का दीप जलाकर मन में,
ज्ञान ज्योति से जग चमकाओ ।

हार नहीं मानोगे तब तक,
जब तक मंजिल नहीं मिले ।

पूर्ण सफल जब बन जाओ ,
मैडम का तब नाम बढ़ाओ ।

Friday, 9 February 2018

नन्हा बीज

विश्व शांति का नाद हूँ मैं
दिनकर की प्रभात हूँ मैं

निश्चल मन का साज़ हूँ मैं
अंतर्मन का तार हूँ मैं

नव उषा का प्रकाश हूँ मैं
पंछी कलरव गान हूँ मैं

निशा का तम भी हूँ मैं
तारों का झुरमुट हूँ मैं

चंद्रज्योत्सना चाँद हूँ मैं
खुला गगन आकाश हूँ मैं

सात रंग का इंद्र धनुष मैं
वर्षा का उंमाद हूँ मैं

कल-कल करता जल तरंग मैं
हिमखंड का हिमपात हूँ मैं

ठंडी-ठंडी वात हूँ मैं
गीत प्यार मलहार हूँ मैं

वीरो का सिरताज हूँ मैं
मंगल गीत और गान हूँ मैं

लोकतंत्र का राज़ हूँ मैं
क्रांति की आवाज़ हूँ मैं

सीमा रक्षक सपूत हूँ मैं
माँ का प्यारा सुत हूँ मैं

मातृभूमि को पावन करता
नन्हा-सा एक बीज (बाल) हूँ मैं ।।