कविता
“बादलों का शहर : शिलांग”
हरे पहाड़ों की चादर ओढ़े,
प्रकृति यहाँ मुस्काती है।
झरनों की मीठी सरगम में,
जीवन धुन बन जाती है।
बादल आकर छू लेते हैं,
हर ऊँची-नीची राहों को।
मानो स्वर्ग उतर आया हो,
धरती की इन बाँहों में।
पगडंडी पर चलती हवा,
मन में शीतलता भरती है।
थके हुए इंसान के भीतर,
नई उमंगें जगती हैं।
शिलांग केवल शहर नहीं,
सपनों की एक कहानी है।
हरियाली के कोमल आँचल में,
सुकून भरी निशानी है।
झरनों की निर्मल धारा में,
समय ठहर-सा जाता है।
प्रकृति का हर दृश्य यहाँ,
ईश्वर का गीत सुनाता है।
काश! मनुष्य समझ पाता,
धरती की यह सुंदरता।
पेड़ों, पर्वत, नदियों में ही,
बसती जीवन की पवित्रता।
“पूर्व का स्कॉटलैंड” कहकर,
दुनिया इसे बुलाती है।
शिलांग अपनी सादगी से,
हर दिल में बस जाती है।
✍️ लेखनाधिकार सुरक्षित: डॉ. नीरू मोहन
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