Wednesday, 15 August 2018

नीरू मोहन 'वागीश्वरी' की तीन पुस्तकें

आपको जानकर हर्ष होगा कि ‘माण्डवी प्रकाशन’ द्वारा इस माह देश की सुप्रसिद्ध कवयित्री नीरू मोहन ‘वागीश्वरी’ जी के एक साथ दो संकलन  नारी के मनोभावों का सजीव चित्रण( पद्मांजलि ) और प्रेरक बाल रचनाएं ( नव प्रवर्तन ) प्रकाशित होने जा रहे हैं। प्रस्तुत हैं इन दोनों ही संग्रहणीय पुस्तकों के आवरण पृष्ठ। आशा ही नहीं विश्वास है प्रकाशनोपरांत उपरोक्त दोनों ही संग्रह पाठकों को बेहद पसंद आयेंगे।

- मनु भारद्वाज ‘मनु’
संपादक - माण्डवी प्रकाशन

नीरू मोहन 'वागीश्वरी' की पुस्तक 'बूँद-बूँद सागर'(हाइकु मञ्जूषा) का लोकार्पण नेपाल अंतरराष्ट्रीय साहित्यिक सम्मेलन में कार्यक्रम अध्यक्ष डॉ विजय पंडित जी द्वारा 13-08-2018 सोमवार को संपन्न हुआ ।

Tuesday, 14 August 2018

***स्वतंत्र भारत… मेरा भारत*** लेख

वीरों को शत्-शत् नमन करते हुए समस्त देशवासियों को 72वें स्वाधीनता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ !

***स्वतंत्र भारत… मेरा भारत***
लेख

स्वतंत्र है भारत देश हमारा
इस मिट्टी के हम वासी हैं ।
भारत देश की शान की खातिर
हर राही के हम साथी हैं ।
सीमा की रक्षा पर जो वीर
तैनात हैं भारतवासी हैं ।
उनकी हर कतरे-कतरे पर
हम हिंदवासी आभारी है ।

15अगस्त पूर्ण स्वाधीनता का दिन, देश की आन,बान और शान का प्रतीक, वर्षों की गुलामी के पश्चात प्राप्त स्वतंत्रता का दिन, खुली हवा में सांस लेने का दिल, गर्व और गुमान का दिन । कौन भूल सकता है यह दिन और वह वर्ष जिस दिन हमारे वीरों ने अपने प्राणों की आहुति दे कर देश को अंग्रेजों के चंगुल से आज़ाद करवाया था । वर्षो की गुलामी और कष्टो को सहन करने के पश्चात हमारे वीरों के लहू की एक-एक बूंद की आहुति के बाद हमें यह दिन देखने को नसीब हुआ । आज उन्हीं समस्त वीरों और वीरांगनाओं को शत-शत नमन । वह सभी वीर वंदनीय है जिन्होंने देश की स्वतंत्रता की खातिर अपना सर्वस्व लुटाया, कष्ट सहे, जेल की यातनाएँ सही और उन वीरांगनाओं को नमन जिन के बलिदानों की खातिर हम आज स्वतंत्र भारत की खुली हवा में जी रहे हैं ।

मंगल पांडे, वीर शिवाजी, महाराणा प्रताप, वीर सावरकर, सुभाष चंद्र बोस, भगत सिंह, राजगुरु, सुखदेव जैसे अनेक अनगिनत बलिदानियों के बलिदान की ख़ातिर आज हम आज़ाद है । जिन्होंने अपने खून का एक-एक कतरा देश पर न्यौछावर कर दिया साथ ही साथ स्वतंत्रता की लड़ाई में महिलाओं ने भी पूर्ण योगदान दिया जिनमें रानी लक्ष्मीबाई, कित्तौड़ की रानी चेनम्मा, हाडा रानी, रानी पद्मिनी, सरोजिनी नायडू आदि महिलाओं ने भी अपने जीवन को देश पर न्यौछावर कर दिया और स्वतंत्रता आंदोलन में अपना पूर्ण योगदान दिया । वैसे तो 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम की चिंगारी ने स्वतंत्र भारत की नींव रख दी थी और इस संघर्ष से लोहा लेकर 15 अगस्त सन् 1947 के शुभ दिन हमें आजादी प्राप्त हुई और हम ब्रिटिश शासन से पूर्ण रूप से स्वतंत्र हो गए ।

आजादी तो हमें मिल गई मगर आज भी हमारे समक्ष एक प्रश्न मुँह खोले खड़ा है कि क्या हम आज़ाद हैं , क्या किसी देश से स्वतंत्र होना ही आजादी है । आज के संदर्भ में क्या आज़ादी का कोई ओर भी अर्थ है , तो मैं यही कहूँगी कि आजादी का अर्थ अनुशासनहीनता बिल्कुल नहीं बल्कि अनुशासनप्रिय बने रहकर कर्तव्य मार्ग पर चलना स्वतंत्रता है, किसी दूसरे को कष्ट देकर नहीं दूसरे का कष्ट हर कर उसे साथ लेकर चलना आजादी का अर्थ समझाता है । अपने विचारों से स्वतंत्र…अच्छी सोच को लेकर आगे बढ़ना, सहयोग की भावना को कायम रखना, अपने अच्छे विचारों को व्यक्त कर दूसरों को राह दिखाना आजादी कहलाता है । जी हाँ, अपने स्वार्थों को त्याग कर दूसरों की निस्वार्थ भाव से सेवा करना यही सच्ची आज़ादी है जो दूसरों की भलाई के लिए काम आए ।

मैं उन वीरों को नमन करती हूँ जिनके बलिदान की ख़ातिर आज स्वतंत्र भारत की खुली वायु में सांस ले रहे हैं साथ ही साथ उन वीरों को भी नमन करती स्वतंत्र भारत की सीमाओं पर तैनात भारत को और भारत के प्रत्येक जन को हर क्षण सुरक्षित महसूस करवा रहे हैं । उन वीरों को भी नमन करती हूँ जो देश की रक्षा की ख़ातिर सीमाओं पर अपनी जान गंवा देते हैं सिर्फ और सिर्फ इसलिए कि हम सब भारतवासी सुरक्षित रहें और हम पर कोई आंच ना आए और फिर कोई भी पड़ोसी ताकत हमारे देश की तरफ आँख भी न उठा सके नमन है देश के उन सेवकों को जो अपने जीवन का हर क्षण, हर लम्हा देश के विकास की खातिर न्यौछावर कर रहे हैं । देश की खुशहाली, विकास और तरक्की की ख़ातिर अपने जीवन के अस्तित्व तक को बलिदान कर रहे हैं क्योंकि मेरी नजर में केवल खून का कतरा बहा कर ही हम वीर बलिदानी नहीं कहलाते बल्कि आज के संदर्भ में जब हम स्वतंत्र हैं …अपने जीवन का एक-एक क्षण भी अगर दूसरों की भलाई और देश की ख़ातिर खर्च किया जाए वह भी किसी बलिदान से कम नहीं । किसान खेतों में हल चलाकर तपती धूप में हमारे लिए अन्न पैदा करता है । खुद भूखा रहकर हमारा पेट भरता है वह वंदनीय हैं । बीबी प्रकाश कौर जैसी उन सभी महिलाओं को नमन करती हूँ जो देश की अनाथ बेटियों को जिनको जन्म देते ही कूड़े में फेंक दिया जाता है सहारा, माँ की ममता, पिता का प्यार दे रही हैं । उनके जीवन को श्रेष्ठ बनाने में अपना सर्वस्व लगा रही हैं और निस्वार्थ भाव से कहीं ना कहीं देश के हित में कार्य कर रही हैं । आज आजादी की इस पावन बेला पर हम सभी प्रण लेते है कि हम अपने संकीर्ण विचारों को त्याग कर अनुशासन में रहकर कार्य करेंगे जिससे फिर कोई गोरा हमारे देश की तरफ अपनी काली नज़र न डालें ।

देश हमारा सबसे प्यारा सबसे न्यारा है ।
वीरों का यह देश, यह चमन हमारा है ।
भारत की आन, बान, शान तिरंगा
'वंदे मातरम्' राष्ट्रगीत हमारा है ।
माँ भारती की चूनर सतरंगी
यह वतन हिंदोस्तान हमारा है ।

जय हिंद, जय भारत

नीरू मोहन 'वागीश्वरी'

Saturday, 11 August 2018

मेरा भारत 2020

मेरा भारत 2020 (लेख)


परतंत्र भारत में नहीं जन्मे

न देखी है परतंत्रता 

भारतीय होकर भी दोस्तों 

पाश के बंधनों में जकड़ी है 

हमारी स्वयं की विचारशीलता

जी हाँ मित्रों आज स्थिति यह है कि हम स्वतंत्र होते हुए भी परतंत्र हैं । परतंत्र हैं  अपने ही विचारों के अपनी ही सोच के । मैं आपसे यह कहना चाहूँगी कि अगर हमें भविष्य निर्माण करना है तो वर्तमान को पहले समझना होगा तभी हम अपने सपनों के भारत का निर्माण कर सकते हैं यह तो आप सभी जानते हैं कि आज देश को स्वतंत्र हुए 72 साल बीत चुके हैं मगर अगर देखा जाए तो शायद… शायद नहीं यकीनन आज भी हम स्वतंत्र नहीं है आज हम अपने विचारों के अपनी सोच के अपने स्वभाव के वशीभूत हैं । आज भी हम अपने विचारों और सोच के पाश में बंधे हैं । मैं आप सभी को तीन चार दशक पीछे ले जाना चाहूँगी और देश की स्थिति से रू-ब-रू करवाना चाहूँगी उस समय देश की स्थिति कुछ इस प्रकार थी… कालाबाजारी, घूसखोरी, अराजनीति, अराजकता, आतंकवाद, भ्रष्टाचार जैसी समस्याएँ । यह तो कुछ नहीं अगर सोचे और विचार करें तो स्थिति इससे भी खराब थी । समस्याएँ अधिक थी और समाधान सीमित । आज के संदर्भ में देखा जाए तो यह समस्याएँ अभी भी ज्यों की त्यों बनी हुई हैं … दरिद्रता अपने चरम पर है, भ्रष्टाचार की जड़ें मजबूत हो चुकी है, शिक्षा में राजनीति ने घर कर लिया है, देश की बेटियों की स्थिति चिंताजनक है, पढ़ा-लिखा युवा वर्ग अभी भी बेरोजगार है, इन सभी का कारण भ्रष्ट राजनीति, राजनीति में भाई-भतीजावाद, अशिक्षित और अनपढ़ सदस्यों का राजनीति में प्रदार्पण ।
इसमें कोई संदेह नहीं है कि विकास का स्तर ऊँचा उठा है मगर दूसरी ओर गरीबी का स्तर भी बड़ा है । देश में असमानता के स्तर में बढ़ोतरी हुई है… अमीर फल-फूल गए और गरीब डूब गए सबसे ज्यादा असर मध्यम वर्ग पर पड़ा । जहाँ नए-नए उद्योग-धंधों का तेजी से विकास हुआ है वहीं इसका ख़ामियाज़ा पर्यावरण को चुकाना पड़ा है । जी हाँ, आज हमारा पर्यावरण पूर्ण रूप से दूषित हो चुका है । अभी भी गर हम न चेते तो विनाश संभव है । पेय जल का आभाव, वायु प्रदूषण, कंक्रीट में परिवर्तित वन्य प्रदेश, ग्लेशियरों का पिघलना, नदियों का प्रदूषण आज चर्चा का विषय बन गया है । स्थिति यह है कि सभी एक दूसरे पर दोषारोपण करते नज़र आ रहे हैं मगर सुधार हेतु पहल न तो सरकार और न ही आम जन करता नज़र अ रहा है ।
ओजोन परत नष्ट हो रही
प्रकृति बन रही है अभिशाप
वक्त अभी है विचारिए
वरना…वरना बहुत पछताएँगे आप

मैं आपका ध्यान इस ओर आकर्षित करना चाहूँगी कि जब तक हम वर्तमान की स्थिति को नहीं सुधारेंगे या समझेंगे तब तक हम भविष्य की पृष्ठभूमि तैयार नहीं कर सकते । आज जिन समस्याओं का हम सामना कर रहे हैं अगर उनको मिटाया ना गया या उस पर काबू न पाया गया तो विनाश करीब पाएँगे और ऐसी स्थिति के साथ हम अपने सपनों के भारत का निर्माण नहीं कर सकते हैं फिर चाहे 2020 आ जाए या 2040 स्थिति ऐसी ही बनी रहेगी । स्थिति को सुधारना है तो देश की युवा शक्ति को आगे आना होगा इसके लिए पहल देश के युवाओं को करनी होगी देश को विनाश से बचने के लिए उनको शत-प्रतिशत योगदान देना होगा । पर्यावरण सुधार हेतु कार्य करने होंगे, शिक्षा को उन्नत बनाना होगा, बाल श्रम उन्मूलन, बेटी शिक्षा का प्रसार, स्वच्छ राजनीति, भ्रष्टाचार उन्मूलन उपाय और गरीबी के स्तर में सुधार लाना होगा समस्याएं तो बहुत है मगर अगर इन समस्याओं से निजात पा सके तो हम 2020 में भारत को विश्व स्तर पर न भी ला पाए मगर भारत की आंतरिक समस्याओं से जरूर निजात पा सकते हैं । और 2020 तक ऐसे भारत का निर्माण कर सकते हैं जो शायद हम सभी का सपना है … स्वच्छ, सुसंस्कृत, प्रदूषण रहित, शिक्षित भारत सुदृढ़ भारत ।

भारत मेरा 2020 में ऐसा हो
प्रदूषण रहित और पर्यावरण सुरक्षित हो सम्मान दे हर जन एक दूजे को
धर्म-जाति, भेदभाव और द्वेष से हटकर हो न लड़े कोई कश्मीर, मंदिर-मस्जिद पर राजनीति ऐसी…
अमन, चैन हिंदुस्तान में फैला हो
मेरे सपनों का भारत ऐसा हो
हाँ, मेरा भारत 2020 तक सुनहरा हो
घर की बेटी के मान-सम्मान जैसा हो
मेरा भारत, मेरा भारत
फिर से सोने की चिड़िया जैसा हो
मेरा भारत सुनहरा हो ।
मेरा भारत सुनहरा हो ।

नीरू मोहन 'वागीश्वरी'

Wednesday, 8 August 2018

आमंत्रण पत्र

माननीय प्रधानाचार्य जी
बाल भवन पब्लिक स्कूल
मयूर विहार फेस-2
दिल्ली-110091

हिंदुस्तानी भाषा अकादमी की ओर से आमंत्रण पत्र ।

महोदय जी
सादर प्रणाम
भाषा का प्रश्न बहुत महत्वपूर्ण है । हम लगातार देख रहे हैं कि विदेशी भाषाएँ तेजी से हमारे युवा वर्ग को अपने प्रभाव में ले रही हैं ऐसे में विद्यार्थियों की हिंदी भाषा के प्रति रुचि और सम्मान उत्पन्न हो और वह हिंदी भाषा के साथ जुड़े रहें इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए हिंदुस्तानी भाषा अकादमी के तत्वाधान में 'हिंदुस्तानी भाषा दूत' सम्मान और 'हिंदुस्तानी भाषा प्रहरी' सम्मान योजना के तहत प्रविष्टियाँ आमंत्रित हैं । नियमावली के साथ प्रपत्र संलग्न है जिसे भरकर अकादमी के कार्यालय में डाक द्वारा भेजना है । समस्त जानकारी नियमावली में नीहित है ।

हिंदुस्तानी भाषा अकादमी
सह प्रभारी
नीरू मोहन 'वागीश्वरी'

Saturday, 4 August 2018

बूँद-बूद सागर (हाइकु मंञ्जूषा)

नीरू मोहन वागीश्वरी का प्रथम हाइकु संग्रह जो उनके द्वारा रचित 800 हाइकु
काव्यों का संग्रह है ।आप दिए गए लिंक पर ऑर्डर कर सकते हैं ।


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