Tuesday, 3 March 2026

🎶 गीत: “आओ ऐसी होली खेलें” 🎶

 🎶 गीत: “आओ ऐसी होली खेलें” 🎶

आओ ऐसी होली खेलें, मन का आँगन रंग जाए,

सूखी धरती दिल की सारी, प्रेम से फिर भीग जाए।

आओ ऐसी होली खेलें… होली खेलें…


फागुन की मस्त पवन में देखो, खुशबू नई सी आई है,

टेसू के दहके फूलों ने भी, रंगों की ज्योति जगाई है।

सरसों गाए सोने सा गान, अंबर हँसकर झूमे आज,

मन के कोने-कोने में फिर, जागे मधुरिम सा साज़।

अबीर नहीं बस गालों पर हो,

भीतर का भी शोर थम जाए—

आओ ऐसी होली खेलें…


आओ ऐसी होली खेलें, मन का आँगन रंग जाए…


राधा की पायल सी झंकारे, श्याम सा मधुर सुर छेड़े,

रूठे सपनों की डाली पर, विश्वास के फूल फिर खिले।

जो दूरी थी बरसों से मन में, आज उसे हम धो डालें,

हँसी की पिचकारी भर-भर के, हर पीड़ा को रंग डालें।

न कोई ऊँचा, न कोई नीचा,

सबमें मानवता जग जाए—

आओ ऐसी होली खेलें…


आओ ऐसी होली खेलें, मन का आँगन रंग जाए…


ढोलक की थापें गूँज उठें, जीवन का राग सुनाएँ,

क्षणभंगुर इस मेले में हम, प्रेम के दीप जलाएँ।

जो कहना है प्रेम से कह दो, कल किसने क्या जाना है,

आज हृदय के कैनवास पर, स्नेह का रंग सजाना है।

रंग अगर तन पर चढ़ते हैं,

आत्मा भी मुस्काए—

आओ ऐसी होली खेलें,

करुणा का सागर लाए…


आओ ऐसी होली खेलें…

मन का आँगन रंग जाए…

प्रेम की सतरंगी दुनिया में

हर हृदय आज खिल जाए… 🌸

✍️ लेखनाधिकार सुरक्षित: डॉ. नीरू मोहन

No comments:

Post a Comment