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मधुवाणी-मंजुल शब्दों से, जिनकी पहचान बनी,
शालीनता-संस्कारों में, जिनकी छवि निखरी।
प्रज्ञापुञ्ज प्रखर मस्तक, विवेक-विलास अपार,
चिंतन-चंद्रिका से आलोकित, हर निर्णय उजियार।
कर्तव्यपथ-दीपशिखा बन, तम-तिमिर दूर भगाए,
अनुशासन-अनुराग संग, मर्यादा पथ दिखलाए।
प्रबंधन-प्रवीण, नैतिकता, नीति-निपुणता जिनमें,
नेतृत्व-लालित्य से रचते, विश्वास नए क्षण-क्षण में।
हमारी संस्कारभूमि, जिनसे गौरव पाती है,
शिक्षा-साधना के यज्ञ में, साधना नित सज जाती है।
सौम्य स्वभाव, संयमित मन, करुणा कुंदनहार,
स्नेह–सिक्त व्यवहार आपका, जीत ले हर विचार।
बुद्धि-विलक्षण, दृष्टि-दूरगामी, लक्ष्य-साधक व्यक्तित्व महान,
निर्णय-निर्मल, कर्म-सार्थक, सदा लोकहित-संकल्पवान।
शब्द-शक्ति में शांति-वृत्ति, संवादों में उजास,
व्यक्तित्व आपका बन जाता, मूल्यों का उज्ज्वल प्रकाश।
मंगलमय यह जन्मदिवस, नव-उत्सव-उल्लास लाए,
आयु-यश-आरोग्य बढ़े, जीवन सुविकास पाए।
विद्यालय, समाज, राष्ट्र सदा, पाए नव संबल-दान,
आपकी साधना से दीप्त हों, मूल्य, विवेक, और ज्ञान।
💐💐©️ डॉ नीरू मोहन 💐💐
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