Saturday, 10 January 2026

🌍 विश्व हिंदी दिवस विशेष | छंदयुक्त अलंकारिक कविता (दोहा छंद)

 🌍 विश्व हिंदी दिवस विशेष | छंदयुक्त अलंकारिक कविता (दोहा छंद)

हिंदी केवल भाषा नहीं, संस्कारों की शान,

विश्वमंच पर गूँजती, बनकर मानव-ज्ञान।

गंगा-जमुनी धार सी, शब्दों की उजली धूप,

भाव-विचार के सेतु पर, रचती एक अनूप।

तुलसी की चौपाइयों में, कबीर की हुंकार,

प्रेमचंद की कलम बनी, जन-जन की सरकार।

माटी की सौंधी गंध में, विज्ञान का भी तेज,

लोक-बोली से विश्व तक, हिंदी का विस्तार-वेश।

नाद-ब्रह्म की साधना, छंदों की सजी थाती,

रस, अलंकार, लय लिए, हिंदी सरस सुहाती।

संविधान की चेतना, लोकतंत्र की आस,

हिंदी बोले सत्य को, रखकर सबका पास।

अनुवादों की पुल बने, संवादों की धुरी,

विश्वशनीयता की कसौटी, हिंदी पूरी खरी।

आओ मिलकर शपथ लें, शब्द-दीप जलाएँ,

विश्वमंच पर हिंदी का, गौरव-गीत सुनाएँ।

✍️ लेखनाधिकार सुरक्षित: डॉ. नीरू मोहन

No comments:

Post a Comment