Friday, 9 January 2026

🌾🔥 कविता शीर्षक: "नवभारत का शंखनाद" 🔥🌾

 🌾🔥 कविता शीर्षक: "नवभारत का शंखनाद" 🔥🌾

(वीर रस, समसामयिक चेतना और नव निर्माण का आह्वान)

(आरंभ – उर्जावान स्वर में)

जागो नवयुवक! ये भारत पुकारे,

भविष्य तुम्हारा तुम्हीं से सँवारे।

वक़्त का पहरा सच्चाई माँगे,

अब कर्मों से इतिहास तुम्हीं लिख डाले!

भाव स्पष्टता: (यहाँ वीरता और युवाशक्ति का आह्वान है कि अब बदलाव की मशाल युवाओं के हाथ में है।)

अब भी जलते हैं प्रश्न अंधेरों में,

क्यों झुके हैं दीपक शहरों में?

गाँव अभी भी प्यासा, भूखा,

कहाँ खो गया वो ‘सपनों का सुखा’?

पर सुनो!

जो झुक जाए समय के आगे, वो वीर नहीं कहलाता,

जो टूटे विपत्ति में फिर भी मुस्काए, वही भारत कहलाता!

भाव: (कवि समाज की असमानताओं और चुनौतियों पर प्रहार करता है, और समाधान की ओर मोड़ता है।)

अब शिक्षा का दीप जलाना होगा,

हर अंधियारे में उजियारा फैलाना होगा।

ज्ञान ही रण है, कलम ही तलवार,

सच्चे सपूतों का यही संस्कार!

“अब किताबें बनेंगी ढाल हमारी,

तकनीकी बनेगी जयकार हमारी!”

भाव: (यहाँ शिक्षा, तकनीक और ज्ञान को वीरों का नया शस्त्र बताया गया है।)

प्रकृति कराह रही, धरती जल रही,

मानव अपनी ही छाया से डर रही।

ओ वीरों! अब रण पर्यावरण का है,

बचाना धरा, यही धर्म हमारा है!

“जो पेड़ लगाता है, वही अमरत्व पाता है,

जो पृथ्वी सजाता है, वही सच्चा वीर कहलाता है!”

भाव: (यहाँ पर्यावरण संरक्षण को राष्ट्रधर्म के रूप में प्रस्तुत किया गया है।)

नारी का सम्मान अब संकल्प बने,

हर मन में आदर का अंकुर फले।

वो माँ है, शक्ति है, सृजन की धारा,

उसके बिना अधूरा है सारा!

“जो स्त्री का गौरव पहचाने,

वही युग का सच्चा वीर ठाने।”

भाव: (यहाँ स्त्री सम्मान और समानता को वीरता से जोड़ा गया है।)

अब भ्रष्ट विचारों की बेड़ी तोड़ो,

नव समाज की नींव गढ़ो।

स्वच्छ सोच, स्वच्छ नगर बनाओ,

हर दिल में भारत बसाओ!

“वीर वही जो खुद को जीते,

भीतरी अंधकार को मिटा कर रीते!”

भाव: (यहाँ आत्मसंघर्ष और समाज सुधार को वीरता का असली रूप बताया गया है।)

युवा शक्ति अब मौन न रहे,

सत्य की जय का घोष करे।

कर्म ही पूजा, सेवा ही धर्म,

भारत नवयुग का ले नया स्वरम!

“नव निर्माण की ज्योति जलाओ,

भारत को फिर स्वर्ण बनाओ!”

(समापन – गर्जन स्वर में)

हम बदलेंगे, हम गढ़ेंगे,

भारत फिर से विश्व-शिखर चढ़ेगा!

राष्ट्र प्रथम, यही हमारा मंत्र,

हर हृदय बने अब देश का केंद्र!

“वंदे मातरम् का जयघोष गूंजे,

हर सीमा पर साहस फूले!

जब भारत बोले – ‘हम हैं तैयार!’

तब विश्व झुके, कहे – ‘जय वीर भारत!’”

✍️ लेखनाधिकार सुरक्षित: डॉ. नीरू मोहन

No comments:

Post a Comment