नव वर्ष – धनाक्षरी छंद कविता
नव प्रभात की लालिमा, मन में भर दे आस,
कर्म-दीप की ज्योति जले, मिट जाए हर त्रास।
श्रद्धा-साहस साथ लिए, बढ़ें सत्य के पास,
नव वर्ष रचे उजियारा, हो जीवन में प्रकाश।
बीते दुख की छाया छोड़, हँसकर आगे बढ़,
परिश्रम की नाव लिए, भव-सागर से न डर।
संकल्पों की पतवार से, टूटे हर जड़,
नव पथ पर चलता मानव, पाए मंगल-घर।
करुणा का स्वर गूँज उठे, हर उर में दिन-रात,
सेवा-सुमन से महके, जीवन की हर बात।
ज्ञान-सुधा का पान करें, मिटे अज्ञान की रात,
नव वर्ष बने वरदान, सफल हो हर प्रयास।
✍️ लेखनाधिकार सुरक्षित: डॉ. नीरू मोहन
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