Wednesday, 31 December 2025

नव वर्ष मंगलमय हो... दीया-सा जलता जीवन हो

 नव वर्ष पर दोहा छंद

नव दीप जले मन-देश में, मिटे निराशा-घेर।

कर्म-पथ पर दृढ़ चलें हम, उजले हों हर फेर।


नव वर्ष – दोहा छंद कविता

नव वर्ष का दीप जले, मन-आँगन उजियारा हो,

बीते कल की धूल धुएँ में, हर भय आज निवारा हो।

संकल्प-सलिल में डूबे मन, आशा का दीपक थामे,

कर्म-पथ पर बढ़ते जाएँ, जीवन फिर से सँवारा हो।

खुशियों की लौ स्थिर रहे, न टूटे विश्वास कहीं,

परिश्रम की बाती से ही, जगमग हो हर आस यहीं।

नव प्रभात के संग लिखें, हम प्रेम-सफलता की गाथा,

दीया-सा जलता जीवन हो, अंधियारा दूर रहे यहीं।


नव वर्ष – सौरठ छंद

आशा के दीप जलाइए, नव वर्ष लाए उजास।

कर्म-सुगंध से भर उठे, जीवन की हर श्वास।

✍️ लेखनाधिकार सुरक्षित: डॉ. नीरू मोहन

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