Tuesday, 19 December 2017

आगमन वार्षिकोत्सव 17दिसंबर 2017

  रविवार 17 दिसम्बर को राष्ट्रीय साहित्यिक एवं सांस्कृतिक संस्था ‘आगमन ‘ का वार्षिकोत्सव  फरीदाबाद मॉडल स्कूल के सभागार में आयोजित किया गया जिसमे मुख्य अतिथि के रूप में केंद्रीय इस्पात मंत्री , भारत सरकार माननीय चौधरी बीरेन्द्र सिंह जी की गरिमामयी उपस्थति रही ..अन्य विशिष्ट अतिथियों में चौधरी चाँद सिंह , श्री एच एस मालिक , श्री एस एस गोसाईं , श्रीमती निधि कटारिया , श्री  त्रिभवन कौल शामिल रहे ..समारोह के मुख्य  आकर्षण सुप्रसिद्ध हास्य कवि पद्मश्री श्री सुरेन्द्र शर्मा को ‘आगमन रत्न सम्मान ‘ , अंतर्राष्ट्रीय शायर जनाब हसन काज़मी को ‘शान’ए’अदब’ सम्मान एवं लोकप्रिय कवयित्री डॉ कीर्ति काले को ‘आगमन सरस्वती सम्मान “ से अलंकृत किया गया ..फरीदाबाद के कवि मधुकर को ‘आगमन हाइकू सम्राट “ ,गाजियाबाद के डॉ चेतन आनन्द को ‘दुष्यंत कुमार शिखर सम्मान ‘ , ग्रेटर नॉएडा से श्रीमती मनीषा जोशी को ‘आगमन भूषण सम्मान ‘ , गाजियाबाद से श्रीमती वन्दना कुंअर रायजादा एवं श्रीमती ममता लड़ीवाल को आगमन काव्य विदुषी सम्मान , फरीदाबाद के श्री यशदीप कौशिक रेवाड़ी को ‘आगमन साहित्य शिरोमणि सम्मान ‘ से नवाज़ा गया ...दिल्ली की बहुमुखी प्रतिभा की धनी कुमारी वृंदा सिंघल को “ज्वेल ऑफ़ द नेशन ‘ , सोनीपत की ओजस्वी जोशी को ‘हरियाणा गौरव ‘ गाजियाबाद की भूमि वर्मा को “राइजिंग स्टार “ अवार्ड दिया गया ..साथ ही इंग्लिश क्रिएटिव राइटिंग के लिए श्री सुजीत मुख़र्जी को “बेस्ट पोएट’  अवार्ड  , जिव्या अरोरा एवं कुनिका दीवान को “यंग टैलेंट ‘अवार्ड , फरीदाबाद की दिव्य ज्योति सिंह को अवार्ड ऑफ़ एक्सीलेंस प्रदान किया गया ..जयपुर की रक्तदान को समर्पित स्वयंसेवी  संस्था “आरजे ब्लड हेल्पलाइन “ की टीम को भी ह्यूमैनिटी अवार्ड से सम्मानित किया गया .जयपुर से लोकप्रिय एंकर एवं सामाजिक कार्यकर्ता श्रीमती प्रीति सक्सेना को इस अवसर पर आगमन समूह का ब्रांड एम्बेसडर के ताज से सुशोभित किया गया 

इस अवसर पर गुरुग्राम से अन्तराष्ट्रीय गायक सत्यम उपाध्याय ने ‘मेरे देश की धरती सोन उगले “ गीत गाकर सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया और वृंदा सिंघल एवं भूमि वर्मा ने अपनी खूबसूरत नृत्य प्रस्तुति से समां बाँध दिया ...इसी अवसर पर प्रिंस चार्मिंग एवं बार्बी डॉल -2017 प्रतियोगिता का भी आयोजन हुआ जिसे दर्शको द्वारा काफी सराहा गया 

इसी मौके पर कवि महेंद्र मधुकर के काव्य संग्रह ‘भाव सरिता ‘ का विमोचन भी सम्पन्न हुआ 

17 दिसम्बर को आगमन समूह के संस्थापक अध्यक्ष पवन जैन को भी उनके जन्मदिन पर सभी ने बधाई दी 

इसी अवसर पर टीम आगमन के श्री समोद सिंह चरौरा , श्री मनोज कामदेव , श्रीमती प्रिया सिन्हा  , डॉ ज्योत्स्ना सिंह , सुश्री शिप्रा खरे , डॉ नरेश सागर , श्रीमती नीरू मोहन , श्रीमती निधि मुकेश भार्गव , श्रीमती बबिता गर्ग, श्रीमती नीरू सहगल , श्रीमती हीना माथुर  आदि को भी कार्यक्रम के सफल आयजन में उल्लेखनीय योगदान के लिए सम्मानित किया गया

कार्यक्रम के लाइव टेलीकास्ट के लिए Live50 न्यूज़ चैनल का दिल से आभार   


Tuesday, 12 December 2017

विचार

१• हौंसले बुलंद हैं तो जीत निश्चित है ।।

२• जो मन से हार मान लेते हैं वह जीवन में सफल नहीं हो पाते ।।

३• हमारा उच्चारण नहीं 
उच्च-विचार और उच्च-आचरण
हमें श्रेष्ठ बनाता है ।।

४• ऊँचे कुल में जन्म लेने से कोई ऊँचा नहीँ बनता ।
आप के कर्म ही आप को ऊँचा बनाते हैं ।

५• वाणी की मधुरता
परायों को भी अपना
बना लेती है-------- और शब्दों की कटुता
परायापन ला देती है ।।

६• राही के लिए रास्ता अनुगामी है जो उसे मंजिल तक पहुँचाता है मगर रास्ते का चुनाव राही को स्वयं ही करना होता है ।।
जब रास्ते सही होते है तब मंज़िल दूर नहीं होती ।।

७• जीवन एक वृक्ष के समान है इसे जितना पोषित करोगे उतना ही उत्कृष्ट फल पाओगे ।।

८•भू
प्रभु
की धरा
शीतल-सा
लिए आँचल
गंगधार बहा
पाप कर विनाश
नवसृजन किए जा
जग निर्मल किए जा
लिए अपने साथ
सुर राग ताल
जीवन मेरा
सुरीला
किए
जा

९• सामने वाला आपको तब तक मूर्ख नहीं बना सकता जब तक वह आपके अंदर की कमजोरी को नहीं समझता । जिस दिन वह आप की कमजोरी को भांप लेता है उस दिन आपकी सबसे बड़ी हार होती है । इसलिए अपनी कमजोरी को ताकत बनाकर दूसरों के सामने प्रकट करो जिससे सामने वाला आपकी कमज़ोरी का फायदा न उठा पाए ।

११• जीवन में अब सुकून चाहिए ।
मर-मर के रोज़ जिये हैं ,
अब पाक रूह चाहिए ।
मतलबी यहाँ लोग ,
मतलब हो बात करते हैं ।
नहीं तो कटु शब्दों के वारों से ,
दिलों पे घाव करते हैं ।
नहीं लगाव किसी से
अब इस जहान में मेरे मालिक ।
यहाँ तो लोग
पीछे से वार करते हैं ।

१२• मेरी तनहाई मुझसे ही बात करती है ।
जब मैं नहीं मिलती ,
मेरा इंतज़ार करती है ।
उसे भी पता है...उसके बिना है कौन मेरा ।
इसीलिए तो किसी ओर पे नहीं ,
सिर्फ मेरा एतबार करती है ।

१३• दिन का सूरज अब उजाला नहीँ लाता है ।
रात की चांदनी में गम उभर आता है ।
रैन बीत जाती है , नैन नम रहते हैं ।
अश्कों को पौंछने अब कोई नहीं आता है ।

१४• रुह से निकला हर हर्फ़
सच्चाई बयाँ करता है ।
तेरी बेवफाई का ज़िक्र
हर रोज़ किया करता है ।
तूने रुसवा किया
सरेआम जो मुझे ।
हर दर्द का हिसाब
तनहाई में लिखा करता है ।

१६• परिंदों से सुने थे
कभी कलरव प्यार वाले
                         आज है वो आलम
परिंदों के जहान में
खंडहर हैं मन के आले

१७• जीवन के अनुभव
सीख हमें दे जाते हैं
मुश्किल में मानुष को
जीने की राह दिखाते हैं
तूफानों से बचाते
मझधारों से पार लगाते हैं
रंज और गम में भी अनुभव हमारे
खुशियों की चादर उड़ाते हैं।

Saturday, 9 December 2017

मैँ हूँ प्रसून …

गुलाब, गेंदा, सूरजमुखी,
मोगरा कहो या कहो चमेली ।
फूल हूँ मैं... रंग रूप हजार
नाम से ही मेरी पहचान ।

लाल गुलाब कहलाता हूँ ।
पीला गेंदा वसंत में लाता हूँ ।
सफेद मोगरा और चमेली
सूरजमुखी आदित्य-सी प्रभा फैलाता हूँ ।

कार्य मेरा एक तरह का
शौर्य, वीरगाथा… चाहे हो पूजा-अर्चना वाला ।
हाँ, मैं हूँ पुष्प, सुमन, प्रसून वही
नाम अनेक अर्थ सिर्फ एक……
फूल हूँ मैं……
सिर्फ फूल हूँ मैं……

खुशी में भी काम मैं आता हूँ ,
और गम में भी प्रयोग किया जाता हूँ ।
रौंद दिया जाता कभी कदमों से
कभी शीर्ष सजाता हूँ ।

मंदिर में रोज़ मैं चढ़ता हूँ ।
शैय्या पर भी मैं बिछता हूँ ।
वंदनवार, विदाई, सगाई
सभी जगह ही दिखता हूँ ।

एक नहीं अनेक कृत्य में
काम में मैं ही आता हूँ ।
फिर भी मानुष जन के पैरों से
कुचला चला जाता हूँ ।

बाग-बगिया में खिलकर में
शोभा उपवन बढ़ाता हूँ ।
पथ पर शूरौं की गिरकर में
अपना मान बढ़ाता हूँ ।

गर्व से गौरवान्वित होता …
जब वीरों पर चढ़ाया जाता हूँ ।
तिरंगे में लिपटकर जब
धरती का श्रृंगार बढ़ाता हूँ ।

अरोहित तिरंगा मुझको
मान सम्मान दिलाता है ।
महक से मेरी इस जीवलोक का
कोना-कोना खिल जाता है ।

Wednesday, 6 December 2017

*मनहरण घनाक्षरी*

*मनहरण घनाक्षरी*
8,8,8,7 वर्णों पर यति।
अंत मे लघु गुरु।

~~~~~~~~~~~
श्वेत हंस के समान,
देश अपना महान,
गुणवान भारतीय
संत तुलनीय हैं।

बगुले भगत बने,
श्वेत रंग रूप तने,
हंस के समान नहीं,
होय पूजनीय हैं।

मात शारदे विमान,
हंस होय दयावान,
चुगते हैं मोती सीप,
जग वंदनीय हैं।

कौए करें काँव-काँव,
उनका न कोई ठाँव,
नोचते हैं माँस नित्य,
कर्म निंदनीय हैं।

     

Thursday, 16 November 2017

आत्म अभिव्यक्ति

बचपन जीवन का आईना है । बचपन रेत का घरौंदा है । बचपन तारों का झुरमुट है । बचपन सागर से मिला रतन है । बचपन सीप का मोती है । बचपन दीपक की ज्योति है , जो अपनी अटखेलियों से पूरे घर में रौनक और रोशनी फैलाता है । बचपन एक सुखद लम्हा है जो याद आता है तो मुँख पर मुस्कान फैलाता है । इस पुस्तक में नई कविताओं के माध्यम से कुछ नया करने की कोशिश की है । आज बच्चों के लिए उत्कृष्ट साहित्य उपलब्ध नहीं है और लेखक भी बच्चों के लिए कलम कम ही उठाते हैं । आज बाल साहित्य ओझल होता जा रहा है । बच्चों के लिए पढ़ने की सामग्री नहीं है और जो है वह भी पुरानी हो चली है । आज बच्चे नया चाहते हैं । इस पुस्तक के माध्यम से बच्चों को कुछ अच्छा साहित्य देने की कोशिश की गई है ।
4 से लेकर 14 साल तक के बच्चों के लिए पढ़ने हेतु सामग्री को एक ही पुस्तक में संजोया है , जिसमें कविताओं के साथ-साथ व्याकरण संबंधी ज्ञान भी उपलब्ध है । ज्ञातव्य है कि हमारे नौनिहालों को व्याकरण संबंधी बहुत कठिनाई होती है । मेरी कलम ने उनकी इस परेशानी का कुछ हद तक हल निकाला है और एक नए काव्यात्मक रूप में व्याकरण का कुछ अंश इस पुस्तक के माध्यम से उनके समक्ष प्रस्तुत किया है । ईश्वर की अनुकंपा रही तो भविष्य में बच्चों के लिए उत्कृष्ट साहित्य सामग्री लाने की मेरी कोशिश रहेगी ।

Tuesday, 14 November 2017

आत्म अभिव्यक्ति

नारी समाज की ऐसी संवेदनशील पात्र हैं जो सदियों से करुणा दया प्यार ममता की मूरत कही जाती हैं । कहते हैं नारी तेरे रूप अनेक कहीं कौशल्या तो कहीं केकैय अनेक । नारी इस जीव लोक पर ईश्वर का उपहार है जो सृष्टि के निर्माण के लिए ईश्वर द्वारा पृथ्वी पर अवतरित हुआ है । नारी ईश्वर की एक ऐसी संरचना है जो सर्वशक्तिशाली कही गई है जिसमें सभी कार्यों को करने की क्षमता और शक्ति है । नारी सौंदर्य का प्रतीक , वीरता की मिसाल , ममता प्यार करूणा और दया की मूरत कही जाती है ।

नारी संपूर्ण रूप से सक्षम है अगर हम इतिहास की ओर रुख करते हैं तो हमें अनेक ऐसे उदाहरण मिल जाते हैं जिसमें हमें नारी के समस्त रूपों का चित्रण मिलता है । मिसाल के तौर पर झांसी की रानी,  रानी पद्मिनी , हाड़ा रानी, पन्नाधाय, मदर टेरेसा, महादेवी वर्मा ऐसे कुछ उदाहरण आज भी जीवांत हैं । हम सदियों से कहते आ रहे हैं , "नारी तू कमजोर नहीं शक्ति शक्ति की संवाहक है, नारी सर्व शक्तिशाली है , नारी नर को जन्म देने वाली है।" फिर भी आज इस समाज में उसी नारी को ,जो पूजनीय हैं कन्या के रूप में निर्ममता से मारा जाता है । उसका अपमान किया जाता है । उसको सरेआम बेपर्दा किया जाता है । यह कैसा समाज है जो जिससे जन्म लेता है उसको ही जन्म से पहले ही मार देता है ।

आज भी समाज में ऐसे समुदाय हैं जो लड़कियों को जन्म से पहले ही मार देते हैं उनको शिक्षा का अधिकार नहीं देते उनको घर से बाहर नहीं निकलने देते । मेरी पुस्तक में समाहित रचनाओं के माध्यम से साहित्य की अनेक विधाओं द्वारा नारी के प्रत्येक रूप का चित्रण किया गया है । समाज में उनकी व्यथा और उसके सुधार की ओर दिशा निर्देश किया गया है । यह एक कोशिश मात्र है नारी की समस्त रूपों का चित्रण समाज के सामने प्रस्तुत करने का । आज की नारी को किसी सहारे की जरूरत नहीं , किसी आरक्षण की जरूरत नहीं है और किसी के सहारे की जरूुरत नहीं है बल्कि आज वह इतनी सक्षम है कि अकेले कंधों पर पूरे परिवार का पालन पोषण कर सकती हैं घर के साथ-साथ बाहर भी अपनी भूमिका निभा सकती है । आज नारी पुरुष के साथ कंधे से कंधा और कदम से कदम मिलाकर चल रही है। बल्कि एक कदम आगे है कहना अतिशयोक्ति नहीं होगा ।

समर्पण

माँ शब्द की अनुभूति ही मन के तारों को झंकृत कर देती है । किताब को लिखने की प्रेरणा मेरी माँ स्वर्गीय 'श्रीमती पदम देवी' हैं । जो आज अपने स्थूल रूप में इस जीव लोक में विद्यमान नहीं है परंतु अपने सूक्ष्म रुप में हमेशा मेरे मन मस्तिष्क में निवास करती है । मेरी माँ ही मेरी प्रेरणा हैं जो मेरे पास न होते हुए भी हमेशा मेरी प्रेरणा रही  हैं । इस किताब में जितनी भी रचनाएँ रची गई हैं उनको लिखते श्रण मेरी माँ मेरी प्रेरणा बन कर मेरी आँखों में और मस्तिष्क के हर कोने में विद्यमान रही हैं जहाँ से विचार बाहर निकल कर लेखनी के रूप में इस श्वेत पत्र पर सिमट कर आपके समक्ष प्रस्तुत हो रहे हैं ।

इस पुस्तक का प्रत्येक शब्द मेरी माँ और उन सभी महिलाओं को समर्पित है जो अपने परिवार के लिए अपने जीवन का हर अंश समर्पित करती हैं । पूरे ब्रह्मांड की समस्त नारी प्रजाति को शब्दों से गुंफित सुमन सुरभि अर्पित करती हूँ । और ईश्वर से कामना करती हूँ कि वह हर नारी को इतनी शक्ति धैर्य साहस प्रदान करें कि वह इस जीव लोक पर हमेशा अच्छे संस्कार और गुणों को प्रवाहित करती रहें और अपने कर्तव्य मार्ग पर बने रह कर इस लोक का उद्यार करती रहे।

Monday, 13 November 2017

नारे

आज का विशेष - नारे

१. रोशन घर हो जाता है
बिजली का बल्ब जलाते ही
देश को अब रोशन करना है
बल्ब का बटन दबाकर ही

२. आज भी कल भी गूँजेगा
जिसके कार्यों का शंखनाद
सौरभ सिंह सोनू की भार्या
सुशोभित होगी नभ पर मान

३. बल्ब का बटन दबाओगे
आने वाला कल सुरक्षित बनाओगे
नेहा सौरभ सिंह बहन को गर तुम
भारी मतों से जीत दिलवाओगे

४. घर को स्वर्ग बनाने वाले
देश का भी उद्धार करेगी
हिंदी नगर की पार्षद बन कर
खुशहाली का सिर्फ ध्यान रखेगी

५. श्रमशील कर्मठ नारी ये
विकास की दिशा प्रवाह करेगी
पर्यावरण, शिक्षा, सुरक्षा और
सुधार के लिए ही काम करेगी