Friday, 12 June 2026

राजस्थान की संस्कृति पर चार पंक्तियां की कविताएँ


1. रंगीला राजस्थान


रेत सुनहरी, नभ नीला है, अनुपम इसकी शान,

घूमर की मधुर थापों से गूँजे हर आँगन-धान।

पगड़ी, ओढ़नी, लोक सुरों का अद्भुत है सम्मान,

कहे नीरू, रंगों से सजा है मेरा राजस्थान।


✍️ लेखनाधिकार सुरक्षित: डॉ. नीरू मोहन



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2. मरुधरा की महिमा


तपती रेत भी देती हमको साहस का उपहार,

कठिन डगर पर चलना सिखलाए इसका हर विस्तार।

ऊँटों की पदचाप सुनाती जीवन का गुणगान,

मरुधरा की महिमा गाता सारा हिंदुस्तान।


✍️ लेखनाधिकार सुरक्षित: डॉ. नीरू मोहन



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3. राजस्थान : शौर्य, संस्कृति और सम्मान


महाराणा की वीरता का गूँजे अमर बखान,

पन्ना धाय के त्याग से जग करता अभिमान।

संस्कृति जिसकी पहचान है, सम्मान जिसकी जान,

शौर्य और गौरव का प्रतीक है राजस्थान।


✍️ लेखनाधिकार सुरक्षित: डॉ. नीरू मोहन



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4. माटी की महक, राजस्थान की चमक


माटी में इतिहास बसा है, खुशबू में संस्कार,

हर कण में बलिदान लिखा है, हर दिल में सत्कार।

हवेलियों की छटा निराली, अनुपम इसकी झलक,

माटी की महक से जगमग है राजस्थान की चमक।


✍️ लेखनाधिकार सुरक्षित: डॉ. नीरू मोहन



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5. मरुभूमि का गौरवगान


थार की रेत सुनाती है संघर्षों की बात,

धूप यहाँ भी जीवन गढ़ती, देती नई सौगात।

लोकगीतों की सरगम में बसता इसका मान,

मरुभूमि का गौरव गाता भारत का सम्मान।


✍️ लेखनाधिकार सुरक्षित: डॉ. नीरू मोहन



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6. राजस्थान की रंगत


कहीं घूमर, कहीं कालबेलिया, कहीं मांड की तान,

कहीं मेले, कहीं उत्सव, कहीं लोकगीत महान।

रंग-बिरंगे परिधानों से खिलता इसका गगन,

राजस्थान की रंगत देखे मुस्काता है चमन।


✍️ लेखनाधिकार सुरक्षित: डॉ. नीरू मोहन



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7. वीरों की धरती राजस्थान


हल्दीघाटी की गाथाएँ आज भी देती पुकार,

वीरों की इस भूमि ने लिखे साहस के अध्याय अपार।

त्याग, धर्म और राष्ट्रभक्ति जिसकी सच्ची पहचान,

वीरों की धरती कहलाता मेरा राजस्थान।


✍️ लेखनाधिकार सुरक्षित: डॉ. नीरू मोहन



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8. संस्कृति के रंग, राजस्थान के संग


लोककला की छवि निराली, अद्भुत इसका रूप,

संगीतों की मधुर लहरियाँ, जैसे शीतल धूप।

परंपराओं की सुगंध से महके सारा जहान,

संस्कृति के रंग लिए चलता राजस्थान।


✍️ लेखनाधिकार सुरक्षित: डॉ. नीरू मोहन



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9. मरुधर का मान


कठिन परिस्थितियों में भी मुस्काना जिसने सीखा,

संघर्षों के बीच सफलता का दीपक जिसने लिखा।

अतिथि-सेवा, प्रेम और साहस जिसकी पहचान,

भारत के मस्तक का तिलक है मरुधर का मान।


✍️ लेखनाधिकार सुरक्षित: डॉ. नीरू मोहन



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10. कहे नीरू : रंगीला राजस्थान


दाल-बाटी की खुशबू महके, गूँजे मधुर लोकगान,

किलों, मंदिरों, हवेलियों से जगमग इसका मान।

शौर्य, प्रेम और संस्कृति का अनुपम है वरदान,

कहे नीरू, भारत का गौरव है रंगीला राजस्थान।


✍️ लेखनाधिकार सुरक्षित: डॉ. नीरू मोहन

सुविचार

 1. मुश्किलें रास्ता रोकती नहीं, रास्ता बनाना सिखाती हैं।

जो गिरकर संभल जाता है, वही मंज़िल तक पहुँच पाता है।



2. समय और संघर्ष कभी व्यर्थ नहीं जाते,

ये इंसान को उसकी असली पहचान दिलाते हैं।



3. हार से मत घबराओ, हार तो एक सबक है,

जीत उसी की होती है, जिसके इरादे अटल हैं।



4. अंधेरों से लड़ने का हौसला रखो,

सूरज बनने का अवसर स्वयं मिल जाएगा।



5. कर्म की राह पर चलते रहो निरंतर,

किस्मत भी एक दिन तुम्हारे दर पर दस्तक देगी।



6. जो अपने दर्द को ताकत बना लेता है,

वह हर तूफान से आगे निकल जाता है।



7. सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं होता,

मेहनत ही हर मंज़िल की असली सीढ़ी होती है।



8. वक्त बदलते देर नहीं लगती,

इसलिए हिम्मत कभी मत बदलना।



9. संघर्ष जितना कठिन होगा,

सफलता का स्वाद उतना ही मधुर होगा।



10. खुद पर विश्वास रखो,

दुनिया का हर बड़ा सफर एक छोटे कदम से शुरू होता है।



1. समय पर

डॉ. नीरू मोहन कहती हैं—

वक्त की रेत मुट्ठी में कहाँ ठहरती है,

जो इसकी कद्र करे, मंज़िल उसी से सँवरती है।


2. रिश्तों पर

डॉ. नीरू मोहन कहती हैं—

रिश्ते शब्दों से नहीं, संवेदनाओं से निभाए जाते हैं,

जो दिल में बसते हैं, वे दूर होकर भी पास नज़र आते हैं।


3. संघर्ष पर

डॉ. नीरू मोहन कहती हैं—

ठोकरों ने ही चलना सिखाया है मुझे,

वरना मंज़िल का रास्ता कौन बताता मुझे।


4. अपेक्षा और उपेक्षा पर

डॉ. नीरू मोहन कहती हैं—

अपेक्षाएँ जब हद से बढ़ जाती हैं अक्सर,

उपेक्षाओं की चुभन भी उतनी ही गहरी होती है।


5. आत्मविश्वास पर

डॉ. नीरू मोहन कहती हैं—

आईनों से नहीं, अपने हौसलों से पहचान बनती है,

भीड़ में नहीं, अपने कर्मों से शान बनती है।


6. जीवन पर

डॉ. नीरू मोहन कहती हैं—

जीवन की किताब में हर पन्ना जरूरी होता है,

कुछ सिखाने के लिए, कुछ सँवारने के लिए।


7. मौन पर

डॉ. नीरू मोहन कहती हैं—

हर सवाल का जवाब शब्दों में नहीं मिलता,

कभी-कभी मौन भी बहुत कुछ कह जाता है।


8. यथार्थ पर

डॉ. नीरू मोहन कहती हैं—

चेहरों की भीड़ में सच कम ही मिलता है,

हर मुस्कान के पीछे एक संघर्ष पलता है।


9. स्त्री शक्ति पर

डॉ. नीरू मोहन कहती हैं—

वो सिर्फ़ घर नहीं, संसार सजाती है,

अपनी पीड़ा छुपाकर सबको हँसाती है।


10. स्वाभिमान पर

डॉ. नीरू मोहन कहती हैं—

झुकना संस्कार है तो झुकिए अवश्य,

पर स्वाभिमान बिके, इतना भी मत झुकिए।



1. रिश्तों पर

रिश्तों की डोर प्रेम से हर पल मजबूत होती है,

स्वार्थ की आँधी आए तो अक्सर कमजोर होती है।

अपनेपन की छाँव में खिलता है हर इंसान,

कहे नीरू, प्रेम से ही बसता है परिवार।


2. बुज़ुर्गों के सम्मान पर

जिन हाथों ने थामकर चलना हमें सिखाया है,

उन्हीं हाथों को अक्सर वक्त ने तन्हा पाया है।

उनके अनुभव में छिपा है जीवन का सार,

कहे नीरू, बुज़ुर्ग हैं घर का सच्चा आधार।


3. नारी सम्मान पर

नारी से ही सृष्टि का सुंदर विस्तार है,

उसके बिना जीवन का हर रंग बेकार है।

सम्मान दो उसे, यही मानवता का मान,

कहे नीरू, नारी से ही महके संसार।


4. पर्यावरण पर

पेड़ों की छाँव में जीवन का संगीत बसता है,

हरियाली से ही धरती का सौंदर्य हँसता है।

प्रकृति की रक्षा करना हम सबका अधिकार,

कहे नीरू, हर पौधा है जीवन का उपहार।


5. सामाजिक एकता पर

भाषाएँ हों अलग मगर दिलों में प्यार रहे,

धर्म कोई भी हो, मानवता का विचार रहे।

मिल-जुलकर चलने में ही जीवन का सम्मान,

कहे नीरू, एकता से बनता है देश महान।


6. शिक्षा पर

ज्ञान का दीपक जब हर घर में जल जाएगा,

अज्ञान का अंधियारा खुद ही मिट जाएगा।

शिक्षा से ही खुलते हैं उन्नति के द्वार,

कहे नीरू, विद्या है जीवन का श्रृंगार।


✍️ लेखनाधिकार सुरक्षित: डॉ. नीरू मोहन



Tuesday, 9 June 2026

"कहे नीरू : रंगीला राजस्थान"

"कहे नीरू : रंगीला राजस्थान"

आल्हड़ धूप में सुनहरी है रेगिस्तान की बात,

राजस्थानी परिधान में बसी है शान की सौगात।

घूमर की लय पर थिरकती संस्कृति की पहचान,

हर रंग में झलकता है राजस्थान का सम्मान।


कुम्भलगढ़ की दीवारें कहती हैं वीरों की कहानी,

मेवाड़ की धरती गाती है राणा की अमर निशानी।

जैसलमेर का सोनार किला सूरज सा दमकता है,

हर पत्थर इतिहास का कोई पन्ना पढ़ता है।


पगड़ी की आन में बसता है स्वाभिमान पुराना,

घाघरे की लहरों में सिमटा है रंगों का खज़ाना।

कठपुतली की बोली हो या मांड की मधुर तान,

हर सुर में गूँजता है मेरा प्यारा राजस्थान।


दाल-बाटी की खुशबू से महक उठे हर द्वार,

अतिथि को देव मानना यहाँ का है संस्कार।

मरुधर की मिट्टी भी देती जीवन का ज्ञान,

कहे नीरू, सादगी में बसता है राजस्थान।


✍️ लेखनाधिकार सुरक्षित: डॉ. नीरू मोहन

शायरी 21

शायरी

1. 


जब भाषा की धुन गूंजती है, तो हर दिल में भारत का गीत बसता है,

हिंदी है हमारी पहचान, हम सबका अभिमान बसता है।

लड़कियों को भी भाषा का सम्मान मिले,

कहे नीरू, हिंदी में ही हमारी शक्ति छिपी है।


2. 


भाषा एक दीपक है, जो अंधेरे में उजाला करता है,

हिंदी में बसी हैं हमारी जड़ें, हमारी धड़कन बनकर बहता है।

सपनों की उड़ान में भाषा को साथी बनाओ,

कहे नीरू, हिंदी में ही भारत का उजाला है।


3. 


जब भारत एकता में बंधा, तो भाषा भी सहारा बनी,

हिंदी ने हर दिल को जोड़ा, हर घर में गूंजा अपना गीत।

गांव से शहर तक, हर कदम पर एकता की बात हो,

कहे नीरू, हिंदी में ही हमारी भारत माता बसती है।


4. 


हिंदी का हर शब्द एक पुल बनाता है,

जो दरवाज़े खोलता है, हर दिल और हर भाषा के लिए।

संस्कृति का ये राग हमें जोड़ता है,

कहे नीरू, हिंदी में ही हमारे सपनों का संसार है।


5. 


जब हम अपनी जड़ों से जुड़े, तो शक्ति मिली हमें,

हिंदी ने हमें बताया, कि हम कौन हैं, कहाँ से आए हैं।

भाषा का सम्मान, भारत का सम्मान है,

कहे नीरू, हिंदी में ही हमारी पहचान है।


6

अल्फ़ाज़ में कहाँ समेट पाते हैं हम दिल की दास्ताँ,

कुछ रिश्ते ख़ामोश रहकर भी उम्र भर बोलते हैं।


7

जो लोग दिल में बसते हैं, वो हर रोज़ नहीं मिलते,

कुछ चेहरे दूर रहकर भी ज़िंदगी के साथ चलते हैं।


8

वक़्त ने सिखा दिया हर दर्द को मुस्कुरा कर सहना,

अब शिकायत कम है हमको, तजुर्बों पर ज़्यादा भरोसा है।


9

जो लोग दिल में बसते हैं, वो हर रोज़ नहीं मिलते,

कुछ चेहरे दूर रहकर भी ज़िंदगी के साथ चलते हैं।


10

जो लोग दिल में बसते हैं, वो हर रोज़ नहीं मिलते,

कुछ चेहरे दूर रहकर भी ज़िंदगी के साथ चलते हैं।

कहे नीरू, ये खामोश यादें,

हमेशा दिल में बसी रहती हैं।


11

गरीबी की रातों में जब सपने भी ठहर जाते हैं,

कहें नीरू, हर बच्चे को शिक्षा का हक़ मिलना चाहिए।


12

लड़की का हर कदम भी हो बराबरी का,

कहे नीरू, बिन सपने अधूरी है ज़िंदगी।


13

सिस्टम के दरो-दीवार में जब आवाज़ें दबती हैं,

कहे नीरू, सच बोलना ही ताकत है।

हर इंसान का हक़ है सपने देखने का,

कहे नीरू, बदलाव की राह पर साथ देना ज़रूरी है।


14

जब आवाज़ें दबती हैं, तो सच और भी ज़ोर से बोलता है,

हर गरीब के पीछे एक सपना छिपा होता है।

लड़कियों के पंखों को काटकर मत देखो,

कहे नीरू, हर उड़ान का हक़ हर इंसान को है।


15

सपने वो नहीं जो रातों में आते हैं,

सपने वो हैं जो सुबह उठकर भी याद रहते हैं।

आओ, साथ मिलकर हम बदलाव की नींव रखें,

कहे नीरू, हर आवाज़ में ताकत है।


16

थार की धूप में सुनहरी है रेगिस्तान की बात,

राजस्थानी परिधान में बसी है शान और बात।

घूमर की लय में थिरकती हैं हर दिलों की बात,

जयपुर की हवेलियों में बसती है हमारी याद।


17

कुंभलगढ़ की दीवारें कहती हैं पुरानी कहानी,

मेवाड़ की बगिया में महकती है रानी।

चांदनी चौक की गलियों में बसा है प्यार,

राजस्थान की संस्कृति है अनमोल आधार।


18

पगड़ी की शान में बसा राजपूतों का अभिमान,

गोटा-पट्टी में लिपटी हर महिला की पहचान।

चोली और घाघरा, रंगों का ये उत्सव,

राजस्थानी वेशभूषा में है संस्कृति का भव्य तसव्वुर।


19

मीनाकारी की चमक, हाथों की बिंदी,

राजस्थानी लहंगा, हर कदम में है ग़ज़ब जिंदगानी।

साड़ी में भी झलकती है एक पुरानी कहानी,

कहे नीरू, राजस्थान का पहनावा है हमारी शान और निशानी।


20

कुंभलगढ़ की दीवारें कहती हैं पुरानी कहानी,

मेवाड़ की बगिया में महकती है रानी।

उदयपुर की झीलों में सपनों का बसेरा,

राजस्थान की हर गली में बसा है प्यार का प्यारा बसेरा।


21

चांदनी चौक में रंगीली महफ़िल सजती है,

घूमर और कालबेलिया से दिल की धड़कन बढ़ती है।

महाराणा प्रताप की वीर गाथा गूंजे,

कहे नीरू, राजस्थान की धड़कन हर दिल में पूजे।


विश्व पर्यावरण दिवस

 विश्व पर्यावरण दिवस

पेड़ों से पूछो, कैसे खड़े रहते हैं धूप की तपिश में भी, बिना शिकायत किए।

नदियों से पूछो, कैसे बहती रहती हैं अपना सब कुछ लुटाकर भी, प्यास किसी की अधूरी न रहे।

धरती से पूछो, कितने घाव सहती है, फिर भी हर मौसम में नई हरियाली उगा देती है।

हमने विकास के नाम पर कितने जंगल काट दिए, सुविधाओं की दौड़ में कितने रिश्ते प्रकृति से बाँट दिए।

अब समय है, सिर्फ़ भाषणों का नहीं, एक पौधा लगाने का, एक पेड़ बचाने का, एक नदी को साफ़ रखने का।

क्योंकि...

जब आख़िरी पेड़ कट जाएगा, आख़िरी नदी सूख जाएगी, और आख़िरी चिड़िया अपना गीत भूल जाएगी,

तब समझ आएगा कि धन से नहीं, धरती से चलती है ज़िंदगी।

आओ, इस पर्यावरण दिवस पर सिर्फ़ संकल्प न लें, अपनी आदतें भी बदलें।

ताकि आने वाली पीढ़ियाँ हमें दोषी नहीं, धरती का सच्चा रखवाला कहें।

धरती हमारी विरासत है,

और विरासत को सँभालना ही

सबसे बड़ी जिम्मेदारी है।

✍️ लेखनाधिकार सुरक्षित: डॉ. नीरू मोहन

"सपनों से जिम्मेदारियों तक : जीवन, संबंध और पुनर्जन्म की कविताएँ"


"सपनों से जिम्मेदारियों तक : जीवन, संबंध और पुनर्जन्म की कविताएँ"

1. तेरा मेरा साथ रहे 

तेरा मेरा साथ रहे,

जैसे सुबह की पहली किरण में

चुपचाप मुस्कान का उजाला रहे…


तेरा मेरा साथ रहे,

जैसे सूखी राहों पर

बारिश की नर्म फुहार का सहारा रहे…


कभी तू थक जाए तो मैं संभाल लूँ,

कभी मैं टूट जाऊँ तो तू पुकार ले…

शब्द कम हों, पर समझ बहुत रहे,

तेरा मेरा साथ रहे…


भीड़ में भी हम अकेले न हों,

हर मोड़ पर एक-दूसरे का भरोसा रहे…

ना कोई शर्त हो, ना कोई हिसाब,

बस दिल से दिल का रिश्ता जिंदा रहे…


तेरा मेरा साथ रहे,

जैसे हवा में खुशबू का एहसास रहे,

और जिंदगी बस यूँ ही

थोड़ी आसान, थोड़ी अपनी सी रहे…



2. जब ज़िंदगी शुरू हो जाती है


जब शौक के लिए वक्त न मिले

तो समझ जाना, ज़िंदगी शुरू हो गई है…


जहाँ किताबें धूल खा जाएँ,

और सपनों की अलमारी

सिर्फ ज़रूरतों से भर जाए…


जहाँ मुस्कान भी

टाइम-टेबल देखकर आए,

और नींद भी थकी हुई आँखों से पूछे—

“आज फिर देर से मिलोगे क्या?”


जब अपने ही शौक

किसी पुराने कोने में रख दिए जाएँ,

और हम बस भागते रहें

कभी काम के पीछे, कभी जिम्मेदारियों के पीछे…


तो समझ लेना,

अब बचपन नहीं रहा,

अब ज़िंदगी शुरू हो गई है—

जहाँ जीना नहीं, निभाना पड़ता है…


पर फिर भी कहीं भीतर

एक छोटा सा बच्चा जिंदा रहता है,

जो कहता है—

“एक दिन फिर से अपने लिए जिऊँगा…”



3. जिम्मेदारियों के दिन


क्योंकि अब दिन सपनों से नहीं,

जिम्मेदारियों के चलने लगे हैं…


सुबह आँख खुलते ही

ख्वाब नहीं, हिसाब खुलता है,

कौन सा काम बाकी है

ये सवाल हर सांस में घुलता है…


पहले जिन रास्तों पर

सपने साथ चलते थे,

अब उन्हीं रास्तों पर

वक्त की भीड़ में हम अकेले चलते हैं…


हँसी भी अब यूँ ही नहीं आती,

पहले सोचती है—

“क्या आज मुझे इजाज़त है?”


और दिल…

वो अब भी कहीं छुपकर

पुरानी ख्वाहिशों को सहलाता है,

पर बाहर आते-आते

जिम्मेदारियों का दरवाज़ा बंद हो जाता है…


फिर भी,

इन सबके बीच

एक उम्मीद धीरे से कहती है—

“थोड़ा और संभाल लो,

शायद एक दिन सपने फिर लौट आएँ…”



4. टूटन का चमत्कार


ईश्वर टूटी हुई चीज़ों का

बखूबी इस्तेमाल करते हैं…


बादल टूटते हैं तो

धरती प्यास बुझा लेती है,

सूखी मिट्टी भी

जीने की वजह पा लेती है…


बीज टूटते हैं तो

एक नया जीवन जन्म लेता है,

टूटकर भी वो

हरियाली का सपना बुन लेता है…


कली बिखरती है तो

फूल बनकर मुस्कुराती है,

और हर टूटन के भीतर

एक नई कहानी बन जाती है…


इंसान भी जब टूटता है

तो बिखरने नहीं आता,

वो भीतर ही भीतर

फिर से खुद को गढ़कर उठ जाता है…


शायद यही नियम है इस सृष्टि का—

जो टूटता है, वही

किसी और रूप में

सबसे सुंदर बनकर लौट आता है…


✍️ लेखनाधिकार सुरक्षित: डॉ. नीरू मोहन 

सिर्फ़ तेरा साथ

सिर्फ़ तेरा साथ

ना सोने की चाहत थी,
ना चाँदी का कोई ख्वाब था,
इस भागती हुई दुनिया में
बस तेरा साथ ही लाजवाब था।

जब जीवन की राहों में
धूप बहुत तीखी हो जाती है,
तब किसी अपने की छाँव ही
पूरी दुनिया बन जाती है।

ना बड़े महलों की इच्छा थी,
ना ऊँचे नाम की कोई प्यास,
बस इतना भर काफी था—
मेरे हाथों में तेरा हाथ।

जब अग्नि को साक्षी मानकर
हमने कुछ वचन निभाने चाहे,
तब समझ आया, रिश्ते केवल
शब्दों से नहीं, विश्वास से बंधते हैं।

समय के संग चेहरे बदलेंगे,
बालों में चाँदी उतर आएगी,
पर यदि साथ बना रहा तेरा,
तो हर उम्र मुस्कुराएगी।

जीवन कोई फूलों की सेज नहीं,
यहाँ काँटे भी मिलते हैं,
पर दो लोग साथ चलें तो
रास्ते आसान लगते हैं।

ना तू पूर्ण, ना मैं पूर्ण,
फिर भी यह बंधन खास है,
क्योंकि सारी दुनिया से बढ़कर
मुझे सिर्फ़ तेरा साथ है।

जब तक साँसों की डोर चले,
जब तक यह जीवन साथ रहे,
हर प्रार्थना में बस यही माँगूँ—
तेरा विश्वास मेरे पास रहे।

दुनिया चाहे जो भी दे दे,
या मुझसे सब कुछ छीन ले,
मेरी सबसे बड़ी दौलत तो
सिर्फ़ तेरा साथ ही रहे।

✍️ लेखनाधिकार सुरक्षित: डॉ. नीरू मोहन