साहित्य सिंधु **गद्य-पद्य संग्रह**
Sunday, 23 August 2026
“कीचड़ में छिपा हुआ आकाश”
›
“कीचड़ में छिपा हुआ आकाश” “जिसे हम कीचड़ समझकर पैरों तले रौंद देते हैं, वही अपने भीतर किसी फूल का भविष्य छिपाए बैठा होता है…” मुझे देखकर लो...
कीचड़ में खिला नाम
›
कीचड़ में खिला नाम शहर में उस दिन बारिश नहीं हुई थी। फिर भी सड़क पर कीचड़ था। अजीब बात यह थी कि कीचड़ सड़क पर कम और लोगों की बातचीत में ज्य...
कीचड़ का आईना
›
कीचड़ का आईना बारिश उस शहर पर नहीं, जैसे लोगों के चेहरों पर बरसी थी। सुबह से लगातार पानी गिर रहा था। सड़कें चमक रही थीं और गलियाँ कीचड़ से ...
Tuesday, 18 August 2026
स्टैंडअप कॉमेडी : हँसते-हँसते जिंदगी की क्लास
›
“दूसरों पर हँसना आसान है… असली मज़ा तो तब है, जब अपनी ही जिंदगी की गलतियों पर हँसना सीख जाएँ!” 😄 स्टैंडअप कॉमेडी : हँसते-हँसते जिंदगी की क...
हास्य विनोद
›
1. अलार्म और हमारा रिश्ता 😄 “मैंने सुबह जल्दी उठने के लिए पाँच अलार्म लगाए। पहला अलार्म बजा—मैंने बंद कर दिया। दूसरा बजा—वो भी बंद। तीसरा ...
Monday, 17 August 2026
“सबको संभालते-संभालते कहीं आप खुद तो नहीं बिखर रहे?”
›
“हर मुस्कुराता चेहरा मज़बूत नहीं होता… कुछ चेहरे सिर्फ दर्द छिपाना जानते हैं।” हर बार मज़बूत होना ज़रूरी नहीं कभी-कभी हम सबको संभालते-संभाल...
Sunday, 16 August 2026
“जो शिक्षक बच्चों का भविष्य सँवारता है, उसके संघर्ष को कौन समझता है?” ❤️
›
“जो शिक्षक बच्चों का भविष्य सँवारता है, उसके संघर्ष को कौन समझता है?” ❤️ शिक्षक होना केवल एक नौकरी नहीं, बल्कि एक जिम्मेदारी और सौभाग्य है।...
›
Home
View web version