Monday, 1 April 2019

परिचय

परिचय
नाम - डॉ.नीरू मोहन 'वागीश्वरी'
जन्म तिथि -1 अगस्त 1973

शिक्षा 
1. स्नातक
2. एन.टी.टी
3. पी.टी.टी
4. डी.ई.सी.ई
5. एडवांस टेकनिकल कोर्स इन ड्रेस डिजाईनिंग(इंस्ट्रक्टर)
6. एम.ए हिंदी
7. एम.ए राजनीति विज्ञान 
8. बी.एड हिंदी, सामाजिक विज्ञान
9. एम. फिल हिंदी साहित्य
शोधकार्य - आदिकाल और रीतिकाल
10. पी.एच-डी 
शोधकार्य - अटल बिहारी वाजपेेयी : जीवन सृजन एवं मूल्यांकन

 कार्यक्षेत्र : भाषाविद्, शिक्षाविद्, प्रेरक वक्त, साहित्य लेखन, समाज सेवा, बाल विकास, नारी उत्थान और हिंदी भाषा उत्थान हेतु समर्पित-

अनुभव : 25 साल (शिक्षण, लेखन, प्रेरक वक्त)

विधाएं : लेख, आलेख, लघु-कथा, संस्मरण, छंदयुक्त और छंदमुक्त कविताएँ, दोहे, हाइकु, चोका, ताँका, रेंगा, सायली छंद, उद्धरण /अवतरण,  सुविचार, कुंडलियाँ, नाटक, नुक्कड़ नाटक, भाषण, कहानी, बाल-कविता एवं कहानियां, समीक्षा, निबंध, शोधकार्य, उपन्यास इत्यादि |

प्रकाशन : रचनाएँ साहित्यपीडिया मंच पर, काव्य संगम पुस्तक, नव पल्लव, नये पल्लव, अविचल प्रवाह, साहित्य संगम एप, साहित्य संगम नारी ग्रुप, सवेरा पत्रिका, अविरल पत्रिका, मुलायम सिंह यादव पुस्तक में लेख, सांझा काव्य संग्रह, विभिन्न पत्रिकाओं, अनेक प्रतिष्ठित समाचार पत्रों में, दीप देहरी कहानी संग्रह, अविरल धारा सांझा काव्य संग्रह, घरौंदा बाल साहित्य कहानी, लम्हों से लफ़्ज़ों तक सांझा काव्य संग्रह, अमर उजाला, संदल सुगंध काव्य संग्रह, काव्य कुंभ सांझा काव्य, काव्य रंगोली संग्रह, एजूकेशन मिर्र, अंतरा, हिंदी लेखक डॉट कॉम, यू कॉटेशन्स डॉट कॉम, हाइकु मञ्जुषा ब्लॉग, लिट्रेचर प्वाइंट, ज्ञान एप, गूगल, वेब और ब्लॉक पर प्रकाशित, साहित्य संचय प्रकाशन द्वारा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शोध आलेख प्रकाशित ।

सम्मान :

आगमन साहित्यिक एवं सांस्कृतिक मंच द्वारा श्रेष्ठ रचनाकार सम्मान

साहित्य संगम संस्थान एवं नारी संस्थान द्वारा दैनिक श्रेष्ठ रचनाकार सम्मान

साहित्य संगम द्वारा दैनिक समीक्षा का अवसर

साहित्य संगम संस्थान द्वारा भाव भूषण सम्मान

साहित्य संगम संस्थान द्वारा वीणापाणि, वागीश्वरी सम्मान

पाठकों और साहित्यिक मंचों द्वारा 'वागीश्वरी' संबोधन प्राप्त

आगमन साहित्यिक संस्थान द्वारा उत्कृष्ट रचना हेतु कई प्रशस्ति पत्र अंग वस्त्र और प्रतीक चिह्न प्राप्त

आगमन साहित्यिक एवं सांस्कृतिक मंच द्वारा आगमन राष्ट्रीय उप-महासचिव के रूप में पद प्राप्त और सम्मानित ।

काव्य रंगोली मातृत्व गौरव सम्मान

Anti corruption foundation of India की ओर से राष्ट्र गौरव सम्मान 2018 से सम्मानित ( 3 जून 2018 )

आगमन गौरव सम्मान 2018 हेतु चयनित ( 8 सितंबर 2018 )

सुपर एचिवर्स अवॉर्ड 2018 (मिशन न्यूज़ 10 जून 2018 )

ड्रीम इंडिया अवार्ड 2018 ( ऑन टाईम वर्ड मीडिया 16 जून 2018 )

नारी शक्ति गौरव अवार्ड 2018 (जयपुर 21 जून 2018)

क्राउन ऑफ सब्सटेंस वीमन सेलिब्रीटीज़ 2018

विलक्षण समाज सारथी सम्मान २०१८ हेतु चयनित

मंथन संस्थान द्वारा नारी गौरव सम्मान २०१८ हेतु चयनित

भारत उत्थान न्यास कानपुर एवं महिला स्नातकोत्तर विश्वविद्यालय गाजीपुर द्वारा अतिथि वक्ता के रूप में आमंत्रित

विभिन्न विद्यालयों, सांस्कृतिक, सामाजिक एवं साहित्यिक संस्थाओं द्वारा निर्णायक एवं मुख्य अतिथि के रूप में  आमंत्रित

वूमेन पॉवर सोसाइटी द्वारा विशिष्ठ अतिथि के रूप में आमंत्रित १६-०२-२०१९ और सम्मानित

ह्यूमन फाउंडेशन एवम् भागीदारी जन समिति की ओर से नारी गौरव सम्मान / स्वर्ण पदक से सम्मानित

एकल प्रकाशन :

प्रकाशित एकल काव्य संग्रह जिनका विमोचन आदरणीय डॉ. रमाकांत शुक्ल जी के कर-कमलों से 6 जनवरी 2019 को सम्पन्न हुआ ।

1. पद्मांजलि ( नारी के मनोभावों का सजीव चित्रण, काव्य संग्रह )

2. नव प्रवर्तन ( बाल-काव्य संग्रह )

3. बूँद-बूँद सागर ( हाइकु मञ्जूषा , काव्य संग्रह ) जापानी काव्य शैली (इंडो नेपाल अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन अगस्त २०१८ में हुआ पुस्तक का विमोचन )

4. क्षितिज… एक अंतहीन सफ़र (सत्य घटनाओं पर आधारित 25 कहानियों का संग्रह) ई-बुक अमेजॉन रूम किंडल पर उपलब्ध। 

अंग्रेज़ी रूपांतर

5. HORIZON… An endless journey ( ebook and paper back available on Amazon and Kindle)

6. व्याकरण ' रस ' (प्रतियोगी परीक्षाओं हेतु 150 महत्वपूर्ण प्रश्नों का संग्रह) अमेजॉन एवं किंडल पर उपलब्ध

7. मीठी-मीठी किलकारियां ( बाल-काव्य संग्रह )

आने वाली पुस्तकें :

1. लेख संग्रह

2. उपन्यास

3. काव्य संग्रह (हिंदी एवं अंग्रेज़ी)

4. व्याकरण ' रचना के आधार पर वाक्य भेद ' प्रश्न-कुंभ

सदस्यता

दिल्ली प्रदेशाध्यक्ष वूमेन पॉवर सोसाइटी रजि० 

संस्थापक/अध्यक्ष वागीश्वरी साहित्यिक, सांस्कृतिक एवं सामाजिक संस्थान

अजीवन सदस्या 'पुलिस की आवाज़ फाउंडेशन'

आगमन साहित्यिक एवं सांस्कृतिक मंच की राष्ट्रीय उप महासचिव ।

हिंदुस्तानी भाषा अकादमी की सदस्या

हिंदुस्तानी भाषा शिक्षक प्रकोष्ठ की सह प्रभारी

सवेरा पत्रिका की अजीवन सदस्या

व्यवस्थापिका- अस्तित्व समूह (१७०० सदस्य)

ईमेल पता -
neerumohan6@gmail.com

ब्लॉग पता - http//myneerumohan.blogspot.com

neerumohan sahityapedia.com

you quote neerumohan.com

neerumohan shabadnagri.com

neerumohan amarujala.com

neerumohangyanapp.in एवं अन्य

Wednesday, 13 March 2019

एनडीएमसी

फिर सम्मानित हुई डॉक्टर नीरू मोहन ' वागीश्वरी '

दिल्ली राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के सौजन्य से भागीदारी जन सहयोग समिति और ह्यूमन फाउंडेशन की ओर से राष्ट्रीय स्तर के कार्यक्रम में डॉ नीरू मोहन वागेश्वरी द्वारा प्रस्तुत शोध पत्र 'राजधानी दिल्ली में महिलाओं के खिलाफ बढ़ते हुए साइबर अपराध उपाय एवं सुझाव' ने राष्ट्रीय स्तर पर शीर्ष 20 में स्थान पाया ।  एनडीएमसी संसद मार्ग में श्री संजय सिंह 'आईपीएस स्पेशल कमिश्नर ऑफ दिल्ली पुलिस' श्री अरविंद शर्मा 'स्टैंडिंग काउंसिल फॉर सीबीआई सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया' श्री राजीव रंजन 'आईपीएस एडीशनल कमिश्नर पुलिस दिल्ली क्राइम ब्रांच' एवं अन्य गणमान्य अतिथियों की उपस्थिति में प्रशस्ति पत्र और स्वर्ण पदक से सम्मानित हुई  । पदमश्री सम्मानित डॉ श्याम सिंह शशि जी ने डॉक्टर नीरू मोहन वागीश्वरी को  अपना प्रस्तुतीकरण हिंदी में संप्रेषित करने के लिए बधाई दी और उनके भावी जीवन में हिंदी सेवा और उत्थान में योगदान देने के लिए आशीर्वाद दिया । डॉ कनुप्रिया 'एसोसिएट डीन अंसल यूनिवर्सिटी और प्रोफेसर चंद्रकांता दिल्ली विश्वविद्यालय ने डॉक्टर नीरू मोहन वागेश्वरी को हिंदी में वक्तव्य प्रस्तुत करने एवं हिंदी भाषा पर अद्भुत अधिकार हेतु बधाई देते हुए उनके वक्तव्य और शोध कार्य को खूब सराहा ।

कानूनी जन जागरूकता कार्य क्षेत्र में उल्लेखनीय सेवा देकर आदर्श प्रस्तुत करने हेतु नागरिक गुणों की उच्च भावना एवं समाज के प्रति समर्पण भाव के लिए 'महिला सशक्तिकरण पुरस्कार' से सम्मानित किया गया ।

Friday, 8 March 2019

राजधानी दिल्ली में महिलाओं के ख़िलाफ़ बढ़ते हुए साइबर अपराध उपाय एवम रोकथाम ....

राजधानी दिल्ली में महिलाओं के ख़िलाफ़ बढ़ते हुए साइबर अपराध उपाय एवम रोकथाम ....
आम जनता, संस्थानों, सरकार और न्याय प्रणाली के लिए सुझाव

1. विद्यालय स्तर पर छठी कक्षा से लेकर बाहरवी कक्षा तक के विद्यार्थियों के पाठ्यक्रम में साइबर और साइबर अपराध से संबंधित विषय पाठ्यक्रम में शामिल किए जाएं ।

2. विद्यालयों और विश्व विद्यालयों में साइबर अपराध से संबंधित कार्यशालाएं आयोजित की जाएं ।

3. जन - जागरूकता अभियान चलाए जाएं  जिससे आमजनता को जागरूक किया जा सके ।

4. समाचारपत्र, विज्ञापन, पोस्टर इत्यादि के माध्यम से इस विषय को लेकर सबको शिक्षित करना ।

5. माता - पिता अपने बच्चों को छोटी उम्र में स्मार्ट फोन से दूर रखें ।

6. 18 साल और इससे कम उम्र की लड़कियों को साइबर अपराध से जुड़ी प्रत्येक जानकारी से अवगत कराने के लिए विद्यालयों और अभिभावकों को मिलकर  सहभागिता कार्यक्रम आयोजित करने चाहिये।

7. निम्न स्तरीय स्थानों , स्लम एरिया एवम गावों में साइबर अपराध , साइबर कानून और इससे जुड़ी प्रत्येक जानकारी को वीडियो कॉन्फ्रेंस, सेमिनार के माध्यम से लोगों तक पहुंचाया जाए ।

8. जिस प्रकार वाहन  चालक के लिए लाइसेंस जरूरी होता है सरकार की तरफ से ऐसा प्रावधान लाया जाए जिसमें सोशल मीडिया का इस्तेमाल करने की आयु निर्धारित की जाएं और उनका साक्षात्कार लिया जाए जो ऑनलाइन / ऑफ लाइन दोनों हो ।

9. सोशल मीडिया प्रयोग की अनुमति उसको ही दी जाए जिसकी आयु 18 साल हो ।

10. आयु जांच हेतु वोटर आईडी कार्ड या 10 वीं का प्रमाण पत्र अनिवार्य ।

Friday, 15 February 2019

पुलवामा अतांकी हमला

पुलवामा आतंकी हमला
'मर्म की चीख'

जम्मू कश्मीर पुलवामा में आतंकी हमले में सी आर पी एफ के 48 जवान शहीद हुए अनगिनत देशभक्त जवान घायल है और कुछ लापता हैं ।

अभी भी चैन-ओ-अमन कहां है ?
सत्ताधारी का कहा वादा कहां है ?
सीमा सुरक्षा की बात तो किया करते थे ।
पुलवामा में आतंकी हमला क्यों हुआ है ?
शहीद हुए हैं जवान भारतीय हमारे
अब कांग्रेसी / बीजेपी के सभी नेता कहां है ?
चुनावों के लिए रैलियां तो खूब कराई तुमने
शहीदों के घरों में चिराग तो जलाओ जाके

आज देश जिस शोक में डूबा हुआ है इसकी भरपाई कैसे की जा सकती है ? क्या भारत के शहीदों को इंसाफ मिल पाएगा या फिर चुनावी रोटियां हीं सैकी जाएंगी । आज बहुत से प्रश्न सभी के जहन में जद्दोजहद कर रहे होंगे शहीदों की परिवार वालों की मार्मिक चीख सत्ताधारी तक कभी नहीं पहुंच पाएगी । अगर पहुंच पाती तो ऐसे हैवानों के लिए जिन्होंने अपना कुकर्म कुबूल लिया है कोई कार्यवाही नहीं की जाती क्या ? सरकार और सत्ताधारी सुप्त अवस्था में है । मीडिया शहीदों के घर परिवार वालों के घरों में जाकर  प्रश्न पूछ रही है कि उन्हें कैसा महसूस हो रहा है ? उनकी सरकार से क्या गुहार है ? क्या सरकार को नहीं पता ? क्या सत्ताधारियों को संज्ञान नहीं कि जिनके घर के चिराग बुझ गए हैं उनके लिए उन्हें क्या करना चाहिए ।  देश के शहीद, मात्रभूमि की रक्षा करने वाले, देश पर अपनी जान न्योछावर करने वालों के लिए देश क्या कर सकता है इसकी भी जानकारी क्या उनके परिवारवाले देंगे ।

ऐसे समय पर उनसे प्रश्न पूछने की बजाए कदम उठाए जाएं । अगर देश के वीर जवानों को सच्ची श्रद्धांजलि अर्पित करनी है तो सरकार को खून के बदले खून और मौत के बदले मौत देनी चाहिए । वो जमाना नहीं है कि एक गाल पर कोई थप्पड़ मारे तो दूसरा गाल आगे कर दिया जाए । आज देश  वीर सैनिकों की शहादत का सवाल है । उरी कांड से सरकार को सीख लेनी चाहिए थी यह आतंकी हमला इसीलिए हुआ है कि उस समय सख्त कार्यवाही नहीं की गई जिसके कारण आज उरी से भी ज्यादा भयानक और मार्मिक दृश्य सामने प्रस्तुत हुआ है । वीर शहीदों की संख्या 19  से  48 / 50 के करीब गई है । सरकार किस सोच में डूबी है । इतना सब होने के बाद किस चीज का इंतजार कर रही है आज हम सभी को इसका जवाब चाहिए ।

डॉ. नीरू मोहन ' वागीश्वरी '

Sunday, 10 February 2019

शीर्षक : हमारी प्रेम कहानी

शीर्षक : हमारी प्रेम कहानी

वेलेंटाइन - डे पर उपहार स्वरूप आज की युवा पीढ़ी के लिए सत्य घटना पर आधारित एक सच्ची प्रेम कहानी

सत्य घटना पर आधारित प्रेम कहानी …जो जीवित थी, जीवित है और जीवित रहेगी ।

जब तक यह संसार है इस तरह की सच्ची और पवित्र प्रेम कहानियां सदैव याद रखी जाएंगी ।

सर्द हवा बहती चली जा रही थी । माथे पर बालों की लटें बादलों की तरह बिखर रही थी । टप - टप - टप बूंदा-बांदी के साथ चाय की गरम चुस्की भरते हुए रश्मि आज भी बचपन के उन दिनों को याद कर रही थी जब वह 8/9 साल की थी । चौथी कक्षा में पढ़ती थी कपड़े पहनने तक की तमीज नहीं थी । बस उसको अपनी मां और नानी का घर ही पसंद था क्योंकि नानी के घर में उसकी हम उम्र बहनें थी । मौसियों और मामियों की लड़कियां कुल मिलाकर घर परिवार में 20 लड़कियों का समूह था । सभी एक से एक सुंदर और ज्ञानवान थी । हर छुट्टी पर रश्मि अपनी नानी के घर ही रहती थी । सुंदर सुशील बुद्धिमान सभी गुण थे । जैसे-जैसे बड़ी होती गई उसकी सुंदरता के आगे चांद भी शरमा जाए । गली मोहल्ले के सभी लड़के उसको पसंद करते थे ।कोई कहता था तेरी भाभी है तो कोई कहता इसको तो एक दिन में ले जाऊंगा । देवेंद्र रश्मि को बचपन से ही पसंद करता था । देवेंद्र भी अपने परिवार में सबसे सुंदर और संस्कारी था । उसके मन में रश्मि के लिए सच्चा प्रेम हिचकोले खा रहा था या यूं कह लो पनप रहा था । बचपन से ही उससे मजाक में भी कोई कह देता कि तू शादी किससे करेगा तो वह झट से जवाब देता कि सामने वाले घर में जो एक सुंदर-सी लड़की है उससे  । सभी परिवार वाले उस समय देवेन का मजाक उड़ाते थे मगर किसी को क्या पता था कि देवेन के नसीब में क्या लिखा है ।

समय बीतता गया देवेन 21 साल का और रश्मि भी 21 साल की हो गई । देवेन के पिता चाहते थे कि जिस प्रकार देवेन की बहन की शादी छोटी उम्र में ही हो गई है देवेन की भी करवा दी जाए । उन्होंने देवेन से इस बारे में बात की… देवेन ने साफ इंकार कर दिया कि अभी शादी नहीं करना चाहता उसे कैरियर बनाना है । कौन जानता था कि मन में तो रश्मि की याद लिए बैठा है देवेन । शादी करेगा तो बचपन वाली लड़की से ही करेगा । दिन बीते कई सावन भादो आए और ऐसे ही चले गए । समय का पलड़ा चलता रहा । देवेन के पिता परेशान थे । बेटा 21 से 25 का हो गया था । देवेन के कहने पर उन्होंने रश्मि के पिता से भी तीन-चार बार बात की थी मगर रश्मि के पिता अपनी लड़की की शादी उनके इतने बड़े परिवार में नहीं करना चाहते थे और देवी की माता जी के बारे में भी कई बातें परिवार मैं फैली हुई थी कि वह झगड़ालू किस्म की महिला है और उसकी किसी के साथ नहीं बनती और वह मिलनसार भी नहीं है । रश्मि के परिवार वाले देवेंद्र के परिवार से रिश्ता नहीं जोड़ना चाहते थे । देवेन के पिता का स्वभाव बहुत अच्छा था मगर फिर भी दोनों परिवारों की बात नहीं बनी हारकर देवेन के पिता ने देवेन के लिए लड़की ढूंढ निकाली और सगाई की तारीख तय हो गई परंतु सगाई नहीं हो पाई और बात वहीं समाप्त हो गई ।

रश्मि की मां बहुत ही संस्कारी और समझदार थी । रश्मि के भी रिश्ते की बात हजारों जगह चली पर हर जगह कोई ना कोई नुक्स एवम खराबी निकल जाती । बात बनते बनते नहीं बन पाती । रश्मि की मां मजाक ही में कह देती रश्मि तेरे लिए शायद देवेन ही बना है उसके साथ ही तेरा रिश्ता करवा देते हैं । रश्मि के विषय में परिवार के पंडित ने रश्मि की जन्मपत्री देखकर कह दिया था पंडित ने भी यही कहा कि आप रश्मि के लिए रिश्ता मत ढूंढिए घर बैठे ही रिश्ता आएगा और आपके साथ यही कहावत सिद्ध होगी कि बगल में छुरी शहर में ढिंढोरा । रश्मि देवेन को बचपन से ही पसंद करती थी मगर उसके परिवार के विषय में जो सुना था उसकी वजह से घबराती थी ।

सुबह का समय था रश्मि की मां के पास उसकी एक सहेली का फोन आया की शीला आज बिरादरी सभा है वहां पर दूर-दूर से लोग अपने लड़के और लड़कियों के रिश्ते के लिए आएंगे क्या पता कोई अच्छा रिश्ता टकरा जाए …रश्मि के लिए । तुम इस सभा में जरूर चलो और रश्मि को भी ले चलना । शीला, रश्मि और शीला की सहेली के परिवार के कई सदस्य बिरादरी की सभा के लिए जाने के लिए राजी हो गए । अच्छे, संस्कारी, पढ़े-लिखे परिवार और लड़के सामने से गुजरे थोड़ी देर बैठ कर रश्मि और उसकी मां सभागार के बाहर कुछ क्षण के लिए आए वहां पर रश्मि देवेन से टकरा जाती है दोनों की नजर मिलती है और बस बचपन की बातें , यादें हिचकोले खाने लगते हैं । देवेन और रश्मि एक दूसरे को देख कर खुश भी होते हैं और एक दूसरे को हाय हेलो भी करते हैं क्योंकि दोनों ही एक दूसरे को बचपन से जानते थे और पसंद भी करते थे । सभागार के अंदर आते ही अपने पिता को रश्मि के आने की सूचना देता और कहता है कि वह आज ही उसके परिवार वालों से यहीं पर बात करें और अब उन्हें किसी और के साथ या और कोई रिश्ता देखने की जरूरत नहीं है वह रश्मि से ही शादी करेगा रश्मि ही उसकी पहली और आखिरी पसंद है ।

देवेन के पिता रश्मि के पिता से इस विषय को लेकर मिलते तो रहते थे मगर उन्हें रश्मि के पिता की ओर से संतुष्टिपूर्ण उत्तर नहीं मिलता था । आज भी बेटे की खुशी के आगे एक बार फिर रश्मि के पिता से बात करने की कोशिश में रश्मि के पिता के पास जाकर उन्होंने सारी बात बता दी फिर क्या था दोनों परिवार का मिलना वही होना था कहते हैं ना कि जोड़ियां ऊपर से बनकर आती है आखिरकार देवेन को अपना बचपन और बचपन की गुड़िया रश्मि मिल गई । उसकी खुशी का ठिकाना ना रहा । 6 साल की उम्र से जिसे पसंद किया था उसको आज अपना बनते देख उसे अनन्त हर्ष हो रहा था मानो उसे कोई खजाना मिल गया हो । सभागार में सारी बातें पक्की हो गई । एक महीने में रोका और आठ महीने के अंदर - अंदर शादी भी हो गई रश्मि दुल्हन बनकर देवेंद्र के घर आ गई देवेन को यकीन नहीं हो रहा था कि जिसे सपनों में देखता था जिसका नाम कॉपियों किताबों में हजारों बार लिखता था । जिसका नाम उसके हाथ में और दिल पर छापा हुआ था वह आज उसके सामने थी ।

यह प्यार ही है जो प्यार करने वालों को किसी ना किसी तरह मिला ही देता है और जिस का प्यार सच्चा होता है उसको किसी भी तरह के प्रलोभन या उपहार की आवश्यकता नहीं होती । जोड़ियां ऊपर वाले के पास लिखी होती हैं और शायद जीवन में किसी ना किसी मोड़ पर हमारी हमारे जीवन साथी से मुलाकात जरुर होती है और नहीं भी होती तो मन में एक तस्वीर छपी होती है जो रश्मि के मन में हमेशा से देवेन की और देवेन के मन में रश्मि की छपी थी । बचपन का प्यार परवान चढ़ चुका था बारिश बंद हो गई थी ठंडी शीत लहर और बसंत पंचमी की प्रभात गुलाबी स्वर्णिम रंग लिए नाच रही थी । रश्मि 7:00 बज गए हैं खाना नहीं बनाना क्या?  देवेन का प्यार  भरे अंदाज में रोज़ रश्मि को समय बताना दोनों के प्यार और साथ का साक्षी है ।आज रश्मि के बाल सफेद और देवेन के बाल उड़ गए हैं बच्चे जवान हो गए हैं समय का पहिया बहुत तेजी से घूमता हुआ बुढ़ापा ले आया है मगर दोनों का प्यार अभी भी वैसा का वैसा बचपन वाला है दोनों रोज़ अपने बचपन के दिन याद करते हैं हर दिन को वैलेंटाइन डे की तरह जीते हैं दोनों का प्यार आज की युवा पीढ़ी के प्यार से बिल्कुल अलग और हटकर है । देवेन और रश्मि बहुत भाग्यशाली हैं जिन्हें एक दूसरे का प्यार और साथ मिला और जो अंत तक कायम रहेगा ईश्वर से यही शुभ कामना है ।

डॉ. नीरू मोहन ' वागीश्वरी '

शीर्षक : हमारी प्रेम कहानी

वेलेंटाइन - डे पर उपहार स्वरूप आज की युवा पीढ़ी के लिए सत्य घटना पर आधारित एक सच्ची प्रेम कहानी

सत्य घटना पर आधारित प्रेम कहानी …जो जीवित थी, जीवित है और जीवित रहेगी ।

जब तक यह संसार है इस तरह की सच्ची और पवित्र प्रेम कहानियां सदैव याद रखी जाएंगी ।

सर्द हवा बहती चली जा रही थी । माथे पर बालों की लटें बादलों की तरह बिखर रही थी । टप - टप - टप बूंदा-बांदी के साथ चाय की गरम चुस्की भरते हुए रश्मि आज भी बचपन के उन दिनों को याद कर रही थी जब वह 8/9 साल की थी । चौथी कक्षा में पढ़ती थी कपड़े पहनने तक की तमीज नहीं थी । बस उसको अपनी मां और नानी का घर ही पसंद था क्योंकि नानी के घर में उसकी हम उम्र बहनें थी । मौसियों और मामियों की लड़कियां कुल मिलाकर घर परिवार में 20 लड़कियों का समूह था । सभी एक से एक सुंदर और ज्ञानवान थी । हर छुट्टी पर रश्मि अपनी नानी के घर ही रहती थी । सुंदर सुशील बुद्धिमान सभी गुण थे । जैसे-जैसे बड़ी होती गई उसकी सुंदरता के आगे चांद भी शरमा जाए । गली मोहल्ले के सभी लड़के उसको पसंद करते थे ।कोई कहता था तेरी भाभी है तो कोई कहता इसको तो एक दिन में ले जाऊंगा । देवेंद्र रश्मि को बचपन से ही पसंद करता था । देवेंद्र भी अपने परिवार में सबसे सुंदर और संस्कारी था । उसके मन में रश्मि के लिए सच्चा प्रेम हिचकोले खा रहा था या यूं कह लो पनप रहा था । बचपन से ही उससे मजाक में भी कोई कह देता कि तू शादी किससे करेगा तो वह झट से जवाब देता कि सामने वाले घर में जो एक सुंदर-सी लड़की है उससे  । सभी परिवार वाले उस समय देवेन का मजाक उड़ाते थे मगर किसी को क्या पता था कि देवेन के नसीब में क्या लिखा है ।

समय बीतता गया देवेन 21 साल का और रश्मि भी 21 साल की हो गई । देवेन के पिता चाहते थे कि जिस प्रकार देवेन की बहन की शादी छोटी उम्र में ही हो गई है देवेन की भी करवा दी जाए । उन्होंने देवेन से इस बारे में बात की… देवेन ने साफ इंकार कर दिया कि अभी शादी नहीं करना चाहता उसे कैरियर बनाना है । कौन जानता था कि मन में तो रश्मि की याद लिए बैठा है देवेन । शादी करेगा तो बचपन वाली लड़की से ही करेगा । दिन बीते कई सावन भादो आए और ऐसे ही चले गए । समय का पलड़ा चलता रहा । देवेन के पिता परेशान थे । बेटा 21 से 25 का हो गया था । देवेन के कहने पर उन्होंने रश्मि के पिता से भी तीन-चार बार बात की थी मगर रश्मि के पिता अपनी लड़की की शादी उनके इतने बड़े परिवार में नहीं करना चाहते थे और देवी की माता जी के बारे में भी कई बातें परिवार मैं फैली हुई थी कि वह झगड़ालू किस्म की महिला है और उसकी किसी के साथ नहीं बनती और वह मिलनसार भी नहीं है । रश्मि के परिवार वाले देवेंद्र के परिवार से रिश्ता नहीं जोड़ना चाहते थे । देवेन के पिता का स्वभाव बहुत अच्छा था मगर फिर भी दोनों परिवारों की बात नहीं बनी हारकर देवेन के पिता ने देवेन के लिए लड़की ढूंढ निकाली और सगाई की तारीख तय हो गई परंतु सगाई नहीं हो पाई और बात वहीं समाप्त हो गई ।

रश्मि की मां बहुत ही संस्कारी और समझदार थी । रश्मि के भी रिश्ते की बात हजारों जगह चली पर हर जगह कोई ना कोई नुक्स एवम खराबी निकल जाती । बात बनते बनते नहीं बन पाती । रश्मि की मां मजाक ही में कह देती रश्मि तेरे लिए शायद देवेन ही बना है उसके साथ ही तेरा रिश्ता करवा देते हैं । रश्मि के विषय में परिवार के पंडित ने रश्मि की जन्मपत्री देखकर कह दिया था पंडित ने भी यही कहा कि आप रश्मि के लिए रिश्ता मत ढूंढिए घर बैठे ही रिश्ता आएगा और आपके साथ यही कहावत सिद्ध होगी कि बगल में छुरी शहर में ढिंढोरा । रश्मि देवेन को बचपन से ही पसंद करती थी मगर उसके परिवार के विषय में जो सुना था उसकी वजह से घबराती थी ।

सुबह का समय था रश्मि की मां के पास उसकी एक सहेली का फोन आया की शीला आज बिरादरी सभा है वहां पर दूर-दूर से लोग अपने लड़के और लड़कियों के रिश्ते के लिए आएंगे क्या पता कोई अच्छा रिश्ता टकरा जाए …रश्मि के लिए । तुम इस सभा में जरूर चलो और रश्मि को भी ले चलना । शीला, रश्मि और शीला की सहेली के परिवार के कई सदस्य बिरादरी की सभा के लिए जाने के लिए राजी हो गए । अच्छे, संस्कारी, पढ़े-लिखे परिवार और लड़के सामने से गुजरे थोड़ी देर बैठ कर रश्मि और उसकी मां सभागार के बाहर कुछ क्षण के लिए आए वहां पर रश्मि देवेन से टकरा जाती है दोनों की नजर मिलती है और बस बचपन की बातें , यादें हिचकोले खाने लगते हैं । देवेन और रश्मि एक दूसरे को देख कर खुश भी होते हैं और एक दूसरे को हाय हेलो भी करते हैं क्योंकि दोनों ही एक दूसरे को बचपन से जानते थे और पसंद भी करते थे । सभागार के अंदर आते ही अपने पिता को रश्मि के आने की सूचना देता और कहता है कि वह आज ही उसके परिवार वालों से यहीं पर बात करें और अब उन्हें किसी और के साथ या और कोई रिश्ता देखने की जरूरत नहीं है वह रश्मि से ही शादी करेगा रश्मि ही उसकी पहली और आखिरी पसंद है ।

देवेन के पिता रश्मि के पिता से इस विषय को लेकर मिलते तो रहते थे मगर उन्हें रश्मि के पिता की ओर से संतुष्टिपूर्ण उत्तर नहीं मिलता था । आज भी बेटे की खुशी के आगे एक बार फिर रश्मि के पिता से बात करने की कोशिश में रश्मि के पिता के पास जाकर उन्होंने सारी बात बता दी फिर क्या था दोनों परिवार का मिलना वही होना था कहते हैं ना कि जोड़ियां ऊपर से बनकर आती है आखिरकार देवेन को अपना बचपन और बचपन की गुड़िया रश्मि मिल गई । उसकी खुशी का ठिकाना ना रहा । 6 साल की उम्र से जिसे पसंद किया था उसको आज अपना बनते देख उसे अनन्त हर्ष हो रहा था मानो उसे कोई खजाना मिल गया हो । सभागार में सारी बातें पक्की हो गई । एक महीने में रोका और आठ महीने के अंदर - अंदर शादी भी हो गई रश्मि दुल्हन बनकर देवेंद्र के घर आ गई देवेन को यकीन नहीं हो रहा था कि जिसे सपनों में देखता था जिसका नाम कॉपियों किताबों में हजारों बार लिखता था । जिसका नाम उसके हाथ में और दिल पर छापा हुआ था वह आज उसके सामने थी ।

यह प्यार ही है जो प्यार करने वालों को किसी ना किसी तरह मिला ही देता है और जिस का प्यार सच्चा होता है उसको किसी भी तरह के प्रलोभन या उपहार की आवश्यकता नहीं होती । जोड़ियां ऊपर वाले के पास लिखी होती हैं और शायद जीवन में किसी ना किसी मोड़ पर हमारी हमारे जीवन साथी से मुलाकात जरुर होती है और नहीं भी होती तो मन में एक तस्वीर छपी होती है जो रश्मि के मन में हमेशा से देवेन की और देवेन के मन में रश्मि की छपी थी । बचपन का प्यार परवान चढ़ चुका था बारिश बंद हो गई थी ठंडी शीत लहर और बसंत पंचमी की प्रभात गुलाबी स्वर्णिम रंग लिए नाच रही थी । रश्मि 7:00 बज गए हैं खाना नहीं बनाना क्या?  देवेन का प्यार  भरे अंदाज में रोज़ रश्मि को समय बताना दोनों के प्यार और साथ का साक्षी है ।आज रश्मि के बाल सफेद और देवेन के बाल उड़ गए हैं बच्चे जवान हो गए हैं समय का पहिया बहुत तेजी से घूमता हुआ बुढ़ापा ले आया है मगर दोनों का प्यार अभी भी वैसा का वैसा बचपन वाला है दोनों रोज़ अपने बचपन के दिन याद करते हैं हर दिन को वैलेंटाइन डे की तरह जीते हैं दोनों का प्यार आज की युवा पीढ़ी के प्यार से बिल्कुल अलग और हटकर है । देवेन और रश्मि बहुत भाग्यशाली हैं जिन्हें एक दूसरे का प्यार और साथ मिला और जो अंत तक कायम रहेगा ईश्वर से यही शुभ कामना है ।

डॉ. नीरू मोहन ' वागीश्वरी '