“पूर्व का स्कॉटलैंड” : प्रकृति की गोद में बसा शिलांग
जब भी प्रकृति अपनी सुंदरता का सबसे कोमल रूप दिखाना चाहती है, तब वह शिलांग जैसी धरती रचती है। मेघालय की राजधानी शिलांग केवल एक शहर नहीं, बल्कि बादलों, पहाड़ियों, झरनों और हरियाली का जीवंत संगीत है। यही कारण है कि इसे “पूर्व का स्कॉटलैंड” कहा जाता है।
शिलांग की सुबहें मानो ओस की बूंदों से कविता लिखती हैं। पहाड़ियों पर तैरते बादल ऐसे प्रतीत होते हैं जैसे आकाश धरती को चूमने उतर आया हो। यहाँ की वादियाँ मन को सुकून देती हैं और झरनों की कल-कल ध्वनि जीवन की थकान मिटा देती है।
आज जब महानगरों की भागदौड़ इंसान को मशीन बना रही है, तब शिलांग प्रकृति और इंसान के बीच टूटते रिश्ते को फिर से जोड़ता दिखाई देता है। यहाँ की स्वच्छ हवा यह एहसास कराती है कि असली सुख ऊँची इमारतों में नहीं, बल्कि प्रकृति के करीब रहने में है।
शिलांग केवल अपनी सुंदरता के लिए ही नहीं, बल्कि अपनी संस्कृति और सादगी के लिए भी जाना जाता है। यहाँ के लोग प्रकृति से प्रेम करना जानते हैं। उनकी जीवनशैली में आधुनिकता है, लेकिन अपनी जड़ों से जुड़ाव भी है। यही संतुलन इस शहर को विशेष बनाता है।
आज पर्यावरण संकट के दौर में शिलांग हमें यह संदेश देता है कि यदि प्रकृति को बचाना है, तो उसके साथ सामंजस्य बनाकर चलना होगा। पहाड़, जंगल और झरने केवल पर्यटन स्थल नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों की धरोहर हैं।
सच ही कहा गया है—
“जहाँ प्रकृति मुस्कुराती है, वहीं मन को सच्चा सुकून मिलता है।”
और शिलांग उसी मुस्कुराती हुई प्रकृति का सुंदर चेहरा है।
✍️ लेखनाधिकार सुरक्षित: डॉ. नीरू मोहन
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